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खतरा: 23 दिन में नहीं आई कोरोना की जांच रिपोर्ट, संदिग्ध फैला रहे संक्रमण!
Wed, 05 May 2021 10:41 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 05 May 2021 10:41 AM IST
सार
जिले में 32 स्टेटिक बूथ हैं। जहां कोई भी अपनी कोरोना जांच करा सकता है। परंतु पिछले एक सप्ताह से स्टेटिक बूथ पर जांच बंद हैं। बस स्टैंड व सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली पूल व रैंडम सैंपलिंग भी ठप है।
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कोरोना वायरस की जांच करता कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए, लेकिन जांच रिपोर्ट 23 दिन बाद भी न मिले तो क्या करें। इस सवाल का जवाब जिला प्रशासन के पास भी नहीं। जिले में 32 स्टेटिक बूथ हैं। जहां कोई भी अपनी कोरोना जांच करा सकता है। परंतु पिछले एक सप्ताह से स्टेटिक बूथ पर जांच बंद हैं। बस स्टैंड व सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली पूल व रैंडम सैंपलिंग भी ठप है। जिला अस्पताल, साईं की तकिया चौराहा स्थित सेवा योजन कार्यालय में सैंपलिंग के लिए 10-10 किमी दूर से संदिग्ध दौड़ लगाने को मजबूर हैं। देहात से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। यहां आरटीपीसीआर टेस्ट आसानी से नहीं हो रहे। एंटीजन टेस्ट से ही संक्रमण की पहचान हो रही है। सैंपलिंग फार्म में दर्ज मोबाइल नंबर पर कोई मैसेज नहीं पहुंच रहा। ऐसे में संदिग्ध घर, मुहल्ले व शहर में धड़ल्ले से घूम रहे हैं। उन्हें पता ही नहीं कि वह निगेटिव हैं या पॉजिटिव।
आगरा में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
केस-एक
रावतपाड़ा निवासी 50 वर्षीय धर्मेंद्र शर्मा ने 12 अप्रैल को सर्दी-खांसी लक्षण होने पर जिला अस्पताल में जांच के लिए नमूना दिया। सैंपलिंग आईडी एजीआरएन 0029202773 मिली। 23 दिन बाद भी उन्हें जांच रिपोर्ट नहीं मिली। धर्मेंद्र ने बताया पिछले साल नवंबर में दिवाली पर मुझे कोरोना हो चुका है। दोबारा लक्षण आने पर जांच कराई। पोर्टल पर रिपोर्ट नहीं आई।
केस-दो
कमला नगर निवासी 25 वर्षीय अनिकेत शर्मा ने 23 अप्रैल को बुखार आने पर जांच के लिए नमूना दिया। सैंपलिंग आईडी 41551772 मिली। आठ दिन बाद 30 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। उन्होंने कहा, मेरे परिवार में एक व्यक्ति पॉजिटिव हो गया। मुझे जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी लग रही है। सैंपल की जांच सही से नहीं हुई।
रावतपाड़ा निवासी 50 वर्षीय धर्मेंद्र शर्मा ने 12 अप्रैल को सर्दी-खांसी लक्षण होने पर जिला अस्पताल में जांच के लिए नमूना दिया। सैंपलिंग आईडी एजीआरएन 0029202773 मिली। 23 दिन बाद भी उन्हें जांच रिपोर्ट नहीं मिली। धर्मेंद्र ने बताया पिछले साल नवंबर में दिवाली पर मुझे कोरोना हो चुका है। दोबारा लक्षण आने पर जांच कराई। पोर्टल पर रिपोर्ट नहीं आई।
केस-दो
कमला नगर निवासी 25 वर्षीय अनिकेत शर्मा ने 23 अप्रैल को बुखार आने पर जांच के लिए नमूना दिया। सैंपलिंग आईडी 41551772 मिली। आठ दिन बाद 30 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। उन्होंने कहा, मेरे परिवार में एक व्यक्ति पॉजिटिव हो गया। मुझे जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी लग रही है। सैंपल की जांच सही से नहीं हुई।
आगरा में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
केस-तीन
गोकुलपुरा निवासी राजीव सक्सैना ने 16 अप्रैल को जांच के लिए जिला अस्पताल में सैंपल दिया। 24 अप्रैल को उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट समय पर मिलती तो मैं जल्दी अस्पताल में भर्ती हो जाता। देरी से भर्ती होने के कारण स्थिति खराब हो गई थी। इस तरह से जांच में देरी होने के कारण संक्रमण भी समाज में फैलता रहेगा।
गोकुलपुरा निवासी राजीव सक्सैना ने 16 अप्रैल को जांच के लिए जिला अस्पताल में सैंपल दिया। 24 अप्रैल को उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट समय पर मिलती तो मैं जल्दी अस्पताल में भर्ती हो जाता। देरी से भर्ती होने के कारण स्थिति खराब हो गई थी। इस तरह से जांच में देरी होने के कारण संक्रमण भी समाज में फैलता रहेगा।
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आगरा में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
हेल्पलाइन भी बेअसर
कोरोना जांच रिपोर्ट के लिए 18001805145 हेल्पलाइन नंबर है। रावतपाड़ा निवासी अशोक शर्मा ने बताया कि 10 दिन लगातार हेल्पलाइन पर रिपोर्ट पता करने के लिए फोन किए। कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हेल्पलाइन भी बेअसर है। जिला अस्पताल में फोन किए तो वहां कोई कॉल रिसीव नहीं करता।
कोरोना जांच रिपोर्ट के लिए 18001805145 हेल्पलाइन नंबर है। रावतपाड़ा निवासी अशोक शर्मा ने बताया कि 10 दिन लगातार हेल्पलाइन पर रिपोर्ट पता करने के लिए फोन किए। कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हेल्पलाइन भी बेअसर है। जिला अस्पताल में फोन किए तो वहां कोई कॉल रिसीव नहीं करता।
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एमआरआई-सीटी स्कैन सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
सीटी स्कैन से हो रही पहचान
जांच रिपोर्ट में लेटलतीफी से परेशान संदिग्ध मरीज संक्रमण का पता कराने के लिए सीटी स्कैन पर निर्भर हो रहे हैं। डी-डाइमर, आरसीपी व खून की जांच से संक्रमण की गंभीरता जांची जा रही हैं। सीटी स्कैन में फेफड़ों की स्थिति से संक्रमण की पहचान हो रही है।
जांच रिपोर्ट में लेटलतीफी से परेशान संदिग्ध मरीज संक्रमण का पता कराने के लिए सीटी स्कैन पर निर्भर हो रहे हैं। डी-डाइमर, आरसीपी व खून की जांच से संक्रमण की गंभीरता जांची जा रही हैं। सीटी स्कैन में फेफड़ों की स्थिति से संक्रमण की पहचान हो रही है।