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असली बिल से बेची नकली दवाएं: कई राज्यों में सप्लाई, करोड़ों का माल जब्त; दवा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 24 May 2026 10:10 AM IST
सार
यूपी में नकली दवाओं के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि नकली दवाओं की तस्करी देश के कई राज्यों में की जा रही थी। करोड़ों की दवाएं इसी तरह बेच दी गईं हैं। औषधि विभाग की टीम कार्रवाई में जुटी है।
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दवाओं की जांच करती टीम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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फर्म संचालक के लैपटॉप से नकली-सैंपल की दवाओं की तस्करी का खेल उजागर हुआ। लखनऊ की फर्म ने असली बिल से कई राज्यों में नकली दवाएं खपा दीं। फर्म के रिकॉर्ड भी सही पाए जा रहे थे, लेकिन लैपटॉप ने सारे राज खोल दिए। इसके बाद विशेष टीम बनी और आगरा में ताबड़तोड़ छापे मारकर करोड़ों की दवाएं जब्त की गईं।
गोदाम पर जांच करती टीम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संचालक के लैपटॉप को खंगाला तो इसमें फर्म के एक ही बिल से कई मेडिकल एजेंसी को दवाएं बेचने की जानकारी मिली। इसी से कई राज्यों में नकली दवाओं की असली बिल से तस्करी का खेल पकड़ में आया। मुख्यालय स्तर से कई जिलों के तेजतर्रार 30 औषधि निरीक्षकों की टीम बनाई गई। इसमें आगरा में 25 फर्म के नाम शामिल हैं।
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छापे से बंद दवा बाजार।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सूची लेकर टीम ने 15 मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर दवाएं जब्त की हैं। तीन मेडिकल स्टोर सीज किए गए। कई विक्रेता भाग गए हैं। टीम को नकली दवाओं की जांच के समय सैंपल और सरकारी दवाएं मिलीं। साथ ही गोदाम भी पकड़ा। सहायक आयुक्त औषधि लखनऊ बृजेश यादव का कहना है कि विशेष टीम ने नकली और सैंपल की दवाओं के रैकेट को पकड़ा है। जांच अभी चल रही है। सैंपल और सरकारी दवाएं बेचना अपराध है।
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गोदाम से जब्त दवाएं।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
केमिकल से मिटाकर करते सैंपल-सरकारी दवाओं की बिक्री
औषधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सैंपल और सरकारी दवाओं के साथ केमिकल भी बरामद हुआ है। इस केमिकल से नॉट फॉर सेल, हॉस्पिटल सप्लाई को मिटाकर बाजार में खपाया जा रहा था। इसमें कंपनी के दवा प्रतिनिधि, हॉकर और विक्रेता का कमीशन तय है।
औषधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सैंपल और सरकारी दवाओं के साथ केमिकल भी बरामद हुआ है। इस केमिकल से नॉट फॉर सेल, हॉस्पिटल सप्लाई को मिटाकर बाजार में खपाया जा रहा था। इसमें कंपनी के दवा प्रतिनिधि, हॉकर और विक्रेता का कमीशन तय है।
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जांच करती टीम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसे चल रहा खेल
फर्म ने नामी कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनवाईं। इनकी पैकेजिंग, बैच नंबर, आकार और प्रिंटिंग हुबहू असली दवाओं जैसी होती है। बिक्री करने के लिए खरीदार बिल मांगते हैं, ऐसे में दवा माफिया अपनी असली फर्म के बिल से दवाओं की बिक्री करते हैं। बिल पाकर खरीदार भी बेफिक्र हो जाते हैं। जब भारी मात्रा में नकली दवाएं बिकने लगती हैं तो असली कंपनियों की बिक्री प्रभावित होती है और कंपनियां विभाग से शिकायत करती हैं। इसके बाद जांच में खेल पकड़ा जाता है। बीते साल आगरा में पकड़ी गईं 71 करोड़ की दवाओं में भी यही खेल सामने आया था। इसमें पुडुचेरी से नामी कंपनियों की नकली दवाएं बनाकर बाजार में खपाई जा रही थीं।
फर्म ने नामी कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनवाईं। इनकी पैकेजिंग, बैच नंबर, आकार और प्रिंटिंग हुबहू असली दवाओं जैसी होती है। बिक्री करने के लिए खरीदार बिल मांगते हैं, ऐसे में दवा माफिया अपनी असली फर्म के बिल से दवाओं की बिक्री करते हैं। बिल पाकर खरीदार भी बेफिक्र हो जाते हैं। जब भारी मात्रा में नकली दवाएं बिकने लगती हैं तो असली कंपनियों की बिक्री प्रभावित होती है और कंपनियां विभाग से शिकायत करती हैं। इसके बाद जांच में खेल पकड़ा जाता है। बीते साल आगरा में पकड़ी गईं 71 करोड़ की दवाओं में भी यही खेल सामने आया था। इसमें पुडुचेरी से नामी कंपनियों की नकली दवाएं बनाकर बाजार में खपाई जा रही थीं।