फिरोजाबाद में डेंगू और वायरल से गुरुवार को चार बच्चों समेत पांच लोगों की मौत हो गई। तीन बच्चों ने चार घंटे के अंतराल में ही सौ शैय्या अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जनपद में डेंगू और वायरल से अब तक 116 लोगों मौत हो चुकी हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे हैं। झलकारी नगर के निकट स्थित बजरंग नगर निवासी कामिनी (4) को सौ शैय्या अस्पताल से आगरा रेफर किया गया। आगरा ले जाते समय कामिनी की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि तीन दिन से कामिनी का सौ शैय्या अस्पताल में इलाज चल रहा था। कामिनी का एक भाई भी सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती है। करबला गली नंबर सात निवासी रितिक (5) पुत्र राजकुमार की भी मौत हो गई। टापाकलां निवासी खुशी (12) पुत्री झम्मनलाल ने भी सौ शैय्या अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में खुशी को गुरुवार को ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हिमांयूपुर निवासी प्रियंका (12) पुत्री सर्वेश की भी सौ शैय्या अस्पताल में मृत्यु हो गई। इधर, शिकोहाबाद के समीपवर्ती गांव नगला बलुआ में डेंगू से 23 वर्षीय अंकित पुत्र रजनेश की दिल्ली में मौत हो गई।
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फिरोजाबाद में जानलेवा बना बुखार: डेंगू-वायरल से पांच की मौत, चार घंटे में तीन बच्चों ने तोड़ा दम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 10 Sep 2021 12:09 AM IST
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फिरोजाबाद: अस्पताल में बीमार बच्ची को लेकर आए परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद का अस्पताल
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आंकड़ों का खेल: सौ शैय्या अस्पताल में लगातार कम हो रही मरीजों की संख्या
सौ शैय्या अस्पताल में मरीजों की संख्या दिनों-दिन घट रही है। स्वास्थ्य विभाग डेंगू और वायरल का प्रकोप अब काबू में आने के आंकड़े पेश कर रहा है। हालांकि अस्पताल में बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को सौ शैय्या अस्पताल और नवनिर्मित बिल्डिंग में बने वार्ड में करीब 409 बच्चे भर्ती थे। एलाइजा टेंस्ट में 142 और बच्चों में डेंगू की पुष्टि हुई। इधर, शहर के निजी अस्पताल फुल है। ऐसे में गंभीर हालत में मरीजों को दिल्ली और आगरा रेफर किया जा रहा है।
सौ शैय्या अस्पताल में मरीजों की संख्या दिनों-दिन घट रही है। स्वास्थ्य विभाग डेंगू और वायरल का प्रकोप अब काबू में आने के आंकड़े पेश कर रहा है। हालांकि अस्पताल में बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को सौ शैय्या अस्पताल और नवनिर्मित बिल्डिंग में बने वार्ड में करीब 409 बच्चे भर्ती थे। एलाइजा टेंस्ट में 142 और बच्चों में डेंगू की पुष्टि हुई। इधर, शहर के निजी अस्पताल फुल है। ऐसे में गंभीर हालत में मरीजों को दिल्ली और आगरा रेफर किया जा रहा है।
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सरकारी अस्पताल फिरोजाबाद
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सौ शैय्या अस्पताल के आंकड़ों पर अब सवाल उठने लगे हैं। एक पलंग पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। बुखार से तपते और बेहोशी की हालत में आने वाले बच्चों को दवा देकर लौटाया जा रहा है। सौ शैय्या अस्पताल में बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे तक 75 नए मरीजों को ही भर्ती किया गया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अब डेंगू काबू में आ गया है। हालांकि मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को चार घंटे में सौ शैय्या अस्पताल में तीन बच्चों ने दम तोड़ दिया है। एक को गंभीर हालत बताकर रेफर किया गया, जिसने रास्ते में दम तोड़ दिया।
फिरोजाबाद: अस्पताल में भर्ती मरीज
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज फिरोजाबाद का कहना है कि सौ शैय्या अस्पताल और नवनिर्मित बिल्डिंग में करीब 400 मरीज भर्ती हैं। सामान्य बुखार से ग्रसित बच्चों को दवा दी जा रही है। गंभीर बच्चों को ही मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जा रहा है। हम स्वयं वार्ड में राउंड ले रहे हैं। एक-एक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
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फिरोजाबाद: अस्पताल में बीमार को लेकर आए परिजन
- फोटो : अमर उजाला
गंभीर बच्चों को देखने नहीं उठे चिकित्सक
राजा का ताल निवासी अंशू (8) पुत्र सोनू को गंभीर हालत में परिजनों ने आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया था। हालांकि बाद में परिजन अंशू को आगरा से सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती कराने के लिए ले आए। अंशू के तीन नली पड़ी थी। ऑक्सीजन भी लगी थी लेकिन सौ शैय्या अस्पताल में गेट पर बैठे चिकित्सक ने 10 मिनट तक बच्चे को देखना जरूरी नहीं समझा। परिजनों ने चिकित्सक से बच्चे को देखने को कहा तो जवाब में चिकित्सक ने कह दिया कि इसे सीनियर डॉक्टर ही देखेंगे। डॉक्टर के इस बात को सुनकर परिजनों और आसपास खड़े लोग आक्रोशित हो गए।
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राजा का ताल निवासी अंशू (8) पुत्र सोनू को गंभीर हालत में परिजनों ने आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया था। हालांकि बाद में परिजन अंशू को आगरा से सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती कराने के लिए ले आए। अंशू के तीन नली पड़ी थी। ऑक्सीजन भी लगी थी लेकिन सौ शैय्या अस्पताल में गेट पर बैठे चिकित्सक ने 10 मिनट तक बच्चे को देखना जरूरी नहीं समझा। परिजनों ने चिकित्सक से बच्चे को देखने को कहा तो जवाब में चिकित्सक ने कह दिया कि इसे सीनियर डॉक्टर ही देखेंगे। डॉक्टर के इस बात को सुनकर परिजनों और आसपास खड़े लोग आक्रोशित हो गए।
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