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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: आगरा की ये महिलाएं हैं संघर्ष, शक्ति और संकल्प की मिसाल, इनके सिर पर ताज
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 08 Mar 2022 10:19 AM IST
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महिला दिवस: आगरा की शक्ति
- फोटो : अमर उजाला
समाज को दिशा देने में महिलाओं की भूमिका किसी भी तरह से कभी कम नहीं है। ये संघर्ष, शक्ति और संकल्प का प्रतीक है। मुसीबत पड़ने पर भी इन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी अटूट इच्छाशक्ति से इसका डटकर सामना किया। कड़े संघर्ष से अपनी सफलता पर निशाना साधा। आइए जानते हैं आगरा की कुछ ऐसी ही नारी शक्ति के बारे में।
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पति को सांस देने का प्रयास करतीं रेनू बंसल (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
आज की सावित्री हैं रेनू बंसल
रेनू ने बताया कि 23 अप्रैल को पति की मृत्यु हुए एक साल हो जाएगा। आज तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली। भाई के मकान में किराये पर रहती हैं। पति की मृत्यु के बाद भाई ने किराया लेना बंद कर दिया। उल्टा, मेरी आर्थिक मदद करता है। कुछ मदद बहनोई से मिल जाती है। रिश्तेदारों का ही अब तो सहारा है। रेनू ने बताया कि बेटी की पढ़ाई छूट गई। इस बार 11वीं कक्षा की परीक्षा प्राइवेट फॉर्म भरा है। पति पेठा व्यवसायी थे। अब बेटी को कहीं नौकरी मिल जाए तो उसके सहारे ही मेरा जीवन कट जाएगा।
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राटौटी गांव की किसान मलुआ देवी
- फोटो : अमर उजाला
खेतों में पसीना बहाकर महकाई परिवार की बगिया
शादी के छह साल बाद पति के बीमार होने के बाद दुख का पहाड़ टूटने पर राटौटी गांव की मलुआ देवी (50) ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने खेतों में पसीना बहाकर अपने परिवार की बगिया दिल्ली के चांदनी चौक तक महका दी है। उनके मानसिक रूप से बीमार पति की हालत पहले से बेहतर है। कामकाज में हाथ बटाने लगे हैं। बेटे गौरव और सौरभ को दिल्ली के चांदनी चौक में रेस्टोरेंट खुलवा दिया। कठिन दौर में हिम्मत हारने वाली आसपास की महिलाओं के लिए मलुआ देवी प्रेरणा का पुंज बनी हुई है। दुख के दिनों में आसपास की महिलाओं को यह कहकर हौसला देती है, कि मुझे देखों और आगे बढ़ो।
कॉर्फबॉल खिलाड़ी रीना सिंह
- फोटो : अमर उजाला
रीना सिंह ने चुनौतियों का सामना कर संभाली इंडियन कॉर्फबॉल की कमान
इंडियन कॉर्फबॉल टीम की कप्तान रह चुकी नगला पदी की रहने वाली रीना सिंह को खेल के दौरान समाज की कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कई लोग पिता सोबरन सिंह और भाई गिर्राज सिंह से कहते थे कि बेटी लड़कों के साथ खेलती है। खिलाड़ियों से कोई शादी नहीं करता है। रीना और उनके परिवार ने समाज की परवाह किए बिना एक अलग मुकाम हासिल किया। वह तीन वर्ल्ड कप खेलने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी। 43 साल की रीना वर्तमान में महिलाओं के लिए विभिन्न क्षेत्र में काम भी कर रहीं हैं।
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एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना की प्रभारी निरीक्षक कमर सुल्ताना
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600 जोड़ों का बसाया घर, 13 बाल विवाह रुकवाए
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना की प्रभारी निरीक्षक कमर सुल्ताना 17 साल से पुलिस में विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वे अब तक परिवार परामर्श केंद्र में 600 जोड़ो का समझौता करा चुकी हैं और 13 बाल विवाह रुकवाने के अलावा 54 लड़कियों को वैश्यावृत्ति से मुक्त कराया है। इनमें से 25 को रोजगार भी दिलाया है।सुल्ताना ने बताया कि वह पुलिस में आने के बाद से ही महिलाओं लिए काम कर रही हैं। उनके काम के लिए मिशन शक्ति अभियान के लिए उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित भी किया है। उन्होंने बताया कि उनके लिए भी यह सफर करना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में पिता समाज के डर से उन्हें रोकते थे, लेकिन दादा रियाद हुसैन और शादी के बाद पति इकबाल हुसैन ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया। अपनी मेहनत और ईमानदारी से आज वे महिलाओं के लिए मिसाल बनी हैं।