संगमरमर पर पच्चीकारी करने वाले हुनरमंद हाथ दो महीने से काम के इंतजार में हैं। कोरोना के कारण पहले 188 दिन तक ताज बंद रहा तो काम खत्म हो गया। सितंबर में ताज खुला तो कुछ आर्डर आने शुरू हुए लेकिन अब फिर से होली से ही काम ठप है। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना के अनुसार करीब 50 हजार लोग संकट में हैं। किसी का बैंक बचत खाता पूरी तरह से खाली हो गया तो कोई कर्ज लेकर जरूरी काम निपटा रहा है। ताजगंज और गोकुलपुरा की गलियों में संगमरमर को तराशने वाले कारीगरों की संख्या अधिक है। कोरोना की पर्यटन पर मार पड़ी तो खरीदार कम हो गए। काम मिलना कम हुआ तो पेशा बदलना पड़ा। अब कोई पानी के प्लांट में काम कर रहा है तो कोई मजदूरी कर रहा है। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हैं। गोकुलपुरा, पंचकुइयां, शंभू नगर, ताजगंज, मलको गली में अब सन्नाटा पसरा है, जबकि पहले यहां कारीगर काम करते नजर आते थे।
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कोरोना का असर: संकट में संगमरमर तराशने वाले 50 हजार हुनरमंद, ताजनगरी में दो महीने से बंद है पच्चीकारी
Mon, 31 May 2021 02:05 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 31 May 2021 02:05 PM IST
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मार्बल के बने ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
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हस्तशिल्पी
- फोटो : अमर उजाला
बचत खत्म, बिजली का बिल भी नहीं भर पा रहे
ताजगंज दक्षिणी गेट पर रिजवान की मार्बल हैंडीक्राफ्ट की दुकान है, लेकिन दो माह से यह खुली नहीं है। रिजवान ने बताया कि ताजमहल भले 16 अप्रैल को बंद हुआ, लेकिन होली से ही कोरोना की आहट से पर्यटक बेहद कम रह गए थे। ऐसे में दुकान बंद करनी पड़ी। जो बचत थी, वह सब खर्च हो गई, अब बिजली का बिल भी भरने के लाले हैं।
ताजगंज दक्षिणी गेट पर रिजवान की मार्बल हैंडीक्राफ्ट की दुकान है, लेकिन दो माह से यह खुली नहीं है। रिजवान ने बताया कि ताजमहल भले 16 अप्रैल को बंद हुआ, लेकिन होली से ही कोरोना की आहट से पर्यटक बेहद कम रह गए थे। ऐसे में दुकान बंद करनी पड़ी। जो बचत थी, वह सब खर्च हो गई, अब बिजली का बिल भी भरने के लाले हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
पच्चीकारी छोड़ी, कर रहा हूं नौैकरी
घर-घर में पच्चीकारी का काम किया जाता था, लेकिन 14 माह से काम लगभग ठप सा हो गया है। बड़े मार्बल कारोबारी ही आर्डर देते हैं। अब पच्चीकारी छोड़कर प्राइवेट फर्म में नौकरी कर रहा हूं। - विशाल, गोकुलपुरा
घर-घर में पच्चीकारी का काम किया जाता था, लेकिन 14 माह से काम लगभग ठप सा हो गया है। बड़े मार्बल कारोबारी ही आर्डर देते हैं। अब पच्चीकारी छोड़कर प्राइवेट फर्म में नौकरी कर रहा हूं। - विशाल, गोकुलपुरा
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संगमरमर का ताजमहल का नमूना खरीदते पर्यटक फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
ताज के मॉडल भी नहीं बिक रहे
ताजमहल के मॉडल बनाने का घर पर ही काम करता था, लेकिन पिछले लॉकडाउन से ही डिमांड खत्म हो गई है। बेरोजगारी की दशा में दूसरा काम करना पड़ रहा है। -ताज मोहम्मद, गोकुलपुरा
ताजमहल के मॉडल बनाने का घर पर ही काम करता था, लेकिन पिछले लॉकडाउन से ही डिमांड खत्म हो गई है। बेरोजगारी की दशा में दूसरा काम करना पड़ रहा है। -ताज मोहम्मद, गोकुलपुरा
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कांच के हैंडीक्राफ्ट आयटम
- फोटो : अमर उजाला
हैंडीक्राफ्ट को बड़ा नुकसान
लॉकडाउन से सबसे ज्यादा नुकसान हैंडीक्राफ्ट को हुआ है। जिन देशों में सबसे ज्यादा हस्तशिल्प निर्यात हो रहा था, उन अमेरिका, यूरोप के देशों में कोरोना का कहर रहा। ताजमहल बंद होने से पर्यटक आ नहीं रहे तो हस्तशिल्प का काम ठप है। - रजत अस्थाना, अध्यक्ष, हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन
लॉकडाउन से सबसे ज्यादा नुकसान हैंडीक्राफ्ट को हुआ है। जिन देशों में सबसे ज्यादा हस्तशिल्प निर्यात हो रहा था, उन अमेरिका, यूरोप के देशों में कोरोना का कहर रहा। ताजमहल बंद होने से पर्यटक आ नहीं रहे तो हस्तशिल्प का काम ठप है। - रजत अस्थाना, अध्यक्ष, हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन