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जवाहर बाग हिंसा: पांच साल बाद भी शहीद पुलिस अफसरों को नहीं मिल सका न्याय, न 'सम्मान'

Wed, 02 Jun 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 02 Jun 2021 12:03 AM IST
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Mathura Jawahar Bagh Violence Families of martyred police officers await justice
जवाहर बाग हिंसा के पांच साल - फोटो : अमर उजाला

दो जून, 2016 की तारीख को भुलाया नहीं जा सकता। इसी दिन मथुरा का जवाहर बाग हिंसा की आग में जल उठा था। इस हिंसा में तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव शहीद हो गए थे। 27 लोगों की जान गई थी। पांच साल बीतने के बाद भी आज तक शहीद हुए पुलिस अफसरों को न्याय तक नहीं मिला और न ही सम्मान मिल सका। पांचवीं पुण्यतिथि पर शहीद एसपी सिटी की पत्नी अर्चना द्विवेदी श्रद्धासुमन अर्पित करने आ सकती हैं। वह डीएम और एसएसपी से मिलकर पत्र सौंपकर फिर न्याय की मांग करेंगी। बता दें कि साल 2014 में स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के मुखिया रामवृक्ष यादव ने सत्याग्रह के नाम पर जवाहर बाग में अवैध रूप से सैकड़ों लोगों के साथ कब्जा कर लिया था। 2 जून 2016 को जवाहर बाग को कब्जा मुक्त कराने गए तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ फरह संतोष यादव पर कब्जाधारियों ने हमला कर दिया था। 

Mathura Jawahar Bagh Violence Families of martyred police officers await justice
जवाहर बाग हिंसा: एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव (फाइल फोटो) - फोटो : social media

इस हमले में एसपी सिटी और एसएचओ शहीद हो गए थे और 27 लोगों की जान चली गई थीं। इससे पहले कई बार प्रशासन ने बातचीत के माध्यम से रामवृक्ष यादव को समझाया और जवाहर बाग को खाली करने को कहा था। लेकिन उसने प्रशासन की एक नहीं सुनी थी। पुलिस ने दावा किया था कि हिंसा में मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव भी मारा गया था।  

Mathura Jawahar Bagh Violence Families of martyred police officers await justice
जवाहर बाग हिंसा: फाइल फोटो - फोटो : amarujala
जवाहर बाग हिंसा को देखने वाले लोग आज भी सिहर उठते हैं। पांच साल गुजरने के बाद भी आजतक शहीदों को न्याय नहीं मिला और न ही सम्मान मिल सका। एसपी सिटी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ने जांच में देरी पर सवाल उठाकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी। अभी तक यह जांच सीबीआई ही कर रही है। 
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Mathura Jawahar Bagh Violence Families of martyred police officers await justice
जवाहर बाग में विकास कार्य देखते ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
पांच साल में जवाहर बाग की शक्ल और सूरत तो बदल गई। करीब 15 करोड़ रुपये खर्च करके जवाहर बाग का सुंदरीकरण तो करवा दिया गया। लेकिन अभी तक शहीद मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव के नाम से न तो स्मारक बना और न ही अभी तक नाम बदला। जबकि शहीद होने के वक्त प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा समेत कई मंत्रियों ने यह एलान किया था। 
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जवाहर बाग हिंसा: अपने परिवार के साथ तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

पांच साल गुजरने के बाद भी हाल वही पुराना ही है। जान की बाजी लगाकर उपद्रवियों को भगाने वालों को न्याय और सम्मान न मिलना भी सवाल खड़े कर रहा है। अर्चना द्विवेदी ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी व्यथा बताई। उनका कहना है न्याय मिलना तो दूर अभी तक सम्मान भी नहीं मिला। जबकि उनके पति ने जान गंवाकर जवाहर बाग को कब्जामुक्त कराया था।

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