मेरी मां... तेरे चरणों में मेरी यह सफलता अर्पित है। विकट हालात में संघर्ष किया। आज उन सभी को हराकर सौगात के रूप में तेरी झोली में मुझे मिली अपनी शोहरत डाल रही हू्ं। इतना कहते ही प्रदेशीय महिला जिमनास्टिक प्रतियोगिता में इस बार की व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में ऑलराउंड चैंपियन रहीं जिमनास्ट श्रद्धा वर्मा की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। उधर, प्रयागराज में रह रही मां अनुराधा ने जब बेटी के मुंह से मोबाइल पर जिमनास्टिक में शिखर तक पहुंचने की दास्तां सुनी, तो हाईकोर्ट में स्टेशनरी बेचकर अपने परिवार का खर्चा चलाने वाली मां अनुराधा के खुशी से आंसू छलक पड़े। अनुराधा हर रोज हाईकोर्ट परिसर में पेन, पेंसिल, फाइल आदि बेचने जाती हैं।
आगरा हॉस्टल में सन 2014 से जिमनास्टिक का प्रशिक्षण ले रहीं प्रयागराज की रहने वाली जिमनास्ट श्रद्धा वर्मा ने एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेली जा रही प्रदेशीय महिला जिमनास्टिक प्रतियोगिता में पदकों का पंच लगाया। व्यक्तिगत चैपियनशिप में स्वर्ण, अनइवनर्वास में स्वर्ण, बैलेसिंग बीम में रजत, फ्लोर एक्सरसाइज में स्वर्ण और वाल्टिंग में स्वर्ण सहित उन्होंने पांच पदक अपने नाम किए। शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य और एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम के क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी ने श्रद्धा की पीठ थपथपाई तो जिमनास्टिक हाल में मौजूद खेल के सूरमाओं के सीने भी चौड़े हो गए।
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श्रद्धा वर्मा की मां अनुराधा
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मुझे मालूम है बेटी का दमः मां
अमर उजाला से बातचीत करते हुए जिमनास्ट चैंपियन श्रद्धा की मां अनुराधा वर्मा भावुक हो जाती है। अनुराधा बताती हैं कि पति महेश चंद्र वर्मा की तबियत पिछले तीन वर्षों से खराब चल रही है। इसलिए घर का खर्चा हाईकोर्ट परिसर में स्टेशनरी बेचकर चलाती हैं। उन्होंने बताया कि मुझे इस बात की खुशी है कि बेटी की मेहनत को मंजिल मिली।
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जिमनास्टिक की कोच सविता श्रीवास्तव
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सटीकता है ताकतः कोच
एकलव्य स्पोटर्स स्टेडियम में जिमनास्टिक की कोच सविता श्रीवास्तव ने बताया कि सटीकता जिमनास्ट श्रद्धा की सबसे बड़ी ताकत है। यह विशेषता उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग करती है। यही कारण है कि प्रतियोगिता में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
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श्रद्धा के पूर्व कोच राममिलन
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चार घंटे प्रैक्टिस करती हैं श्रद्धा
सन 2012 से हॉस्टल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही जिमनास्ट श्रद्धा के पूर्व कोच राममिलन का कहना है कि शुरुआती दौर से ही जिमनास्ट श्रद्धा में खेल अनुशासन देखने को मिला। उनका जुनून इस कदर है कि कई बार चार घंटे तक प्रैक्टिस करती हैं।
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श्रद्धा की मां अनुराधा
- फोटो : अमर उजाला
जिमनास्ट चैंपियन श्रद्धा का कहना है कि उनकी जीत मां और पिता के त्याग का नतीजा है। श्रद्धा की मां हाईकोर्ट परिसर में फाइलें, पेन और पेंसिल बेचकर घर का भरण पोषण करती हैं। बेटी की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है।