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Sawan 2025: सावन में जरूर करें भगवान शिव के इन मंदिरों के दर्शन, प्रत्येक दरबार की विशेष मान्यता
Thu, 10 Jul 2025 09:47 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 10 Jul 2025 09:47 AM IST
सार
सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय है। ऐसे में आगरा के चारों कोनों पर स्थापित शिवालयों में विशेष पूजा होती है। इन मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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आगरा के चारों कोनों पर विराजमान हैं भगवान महादेव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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सावन का पावन महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। शहर के चारों कोनों पर स्थापित शिव मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भोले बाबा का भव्य शृंगार किया जाएगा। जयकारों से मंदिर गूंज उठेंगे। भक्त आसानी से अभिषेक कर सकें, इसके विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
कैलाश मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैलाश महादेव का दरबार 10 हजार वर्ष पुराना
कैलाश महादेव मंदिर यमुना नदी के किनारे बसा है। महंत गाैरव गिरि ने बताया कि मंदिर 10 हजार साल पुराना है। मंदिर में दो शिवलिंग स्थापित हैं। कैलाश महादेव की स्थापना भगवान परशुराम और उनके पिता जमदग्नि ने की है। मंदिर से सीधे जाया जाए तो महर्षि परशुराम के पिता का आश्रम रेणुका धाम बमुश्किल 6 किमी दूरी पर स्थित है। मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। सावन के सोमवार पर भव्य मेला भी लगता है।
कैलाश महादेव मंदिर यमुना नदी के किनारे बसा है। महंत गाैरव गिरि ने बताया कि मंदिर 10 हजार साल पुराना है। मंदिर में दो शिवलिंग स्थापित हैं। कैलाश महादेव की स्थापना भगवान परशुराम और उनके पिता जमदग्नि ने की है। मंदिर से सीधे जाया जाए तो महर्षि परशुराम के पिता का आश्रम रेणुका धाम बमुश्किल 6 किमी दूरी पर स्थित है। मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। सावन के सोमवार पर भव्य मेला भी लगता है।
बल्केश्वर नाथ महादेव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेल वृक्ष से प्रकट हुए बिल्वकेश्वर नाथ महादेव
शहर के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक बल्केश्वर नाथ महादेव का मंदिर भी है। महंत कपिल नागर के बेटे सेवक अर्चित पांड्या ने बताया कि मंदिर का सही नाम बिल्वकेश्वर नाथ महादेव है। मंदिर तकरीबन 700 वर्ष पुराना है। बताते हैं कि पहले मंदिर के आसपास बेल के वृक्षों का जंगल था। बिल्वकेश्वर नाथ महादेव बेल वृक्ष की जड़ से प्राकट्य हुए हैं। मान्यता है कि बाबा के भभूत में बड़ी शक्ति है। प्रत्येक सोमवार बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। सावन के दूसरे सोमवार पर मेले में यहां काफी भीड़ रहती है। मंदिर में 40 दर्शन करने पर भोलेनाथ मनोकामना पूर्ण करते हैं।
शहर के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक बल्केश्वर नाथ महादेव का मंदिर भी है। महंत कपिल नागर के बेटे सेवक अर्चित पांड्या ने बताया कि मंदिर का सही नाम बिल्वकेश्वर नाथ महादेव है। मंदिर तकरीबन 700 वर्ष पुराना है। बताते हैं कि पहले मंदिर के आसपास बेल के वृक्षों का जंगल था। बिल्वकेश्वर नाथ महादेव बेल वृक्ष की जड़ से प्राकट्य हुए हैं। मान्यता है कि बाबा के भभूत में बड़ी शक्ति है। प्रत्येक सोमवार बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। सावन के दूसरे सोमवार पर मेले में यहां काफी भीड़ रहती है। मंदिर में 40 दर्शन करने पर भोलेनाथ मनोकामना पूर्ण करते हैं।
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पृथ्वीनाथ महादेव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अद्भुत है पृथ्वीनाथ महादेव का दरबार
मंदिर के पुजारी अजय राजौरिया ने बताया कि पृथ्वीनाथ महादेव की प्रतिमा द्वापर युग की बताई जाती है। अपने पूर्वजों से सुना है कि श्रीकृष्ण जी ने जहां-जहां लीला रचाई, वहां-वहां शिव जी दर्शन के लिए जाते थे। मंदिर पृथ्वी के गर्भ से अवतरित हुआ था। शताब्दियों पहले खोदाई में अनूठे शिवलिंग सहित इसके चारों खंभे पृथ्वी के गर्भ से निकले थे। कन्नौज से युद्ध करके लौट रहे पृथ्वीराज चौहान ने यहीं पर रात्रि विश्राम किया था। इसलिए पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर पड़ा। मंदिर फतेहपुर सीकरी मार्ग पर स्थित है।
मंदिर के पुजारी अजय राजौरिया ने बताया कि पृथ्वीनाथ महादेव की प्रतिमा द्वापर युग की बताई जाती है। अपने पूर्वजों से सुना है कि श्रीकृष्ण जी ने जहां-जहां लीला रचाई, वहां-वहां शिव जी दर्शन के लिए जाते थे। मंदिर पृथ्वी के गर्भ से अवतरित हुआ था। शताब्दियों पहले खोदाई में अनूठे शिवलिंग सहित इसके चारों खंभे पृथ्वी के गर्भ से निकले थे। कन्नौज से युद्ध करके लौट रहे पृथ्वीराज चौहान ने यहीं पर रात्रि विश्राम किया था। इसलिए पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर पड़ा। मंदिर फतेहपुर सीकरी मार्ग पर स्थित है।
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मन:कामेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मन:कामेश्वर और रावली महादेव भी
शहर के मध्य में श्री मन:कामेश्वर महादेव मंदिर है। मंदिर के महंत योगेश पुरी के मुताबिक बालकृष्ण के दर्शन करने जाते समय भगवान शिव यहां आए थे। उन्होंने बालकृष्ण के दर्शन की मनोकामना की थी। तभी से भगवान का नाम मनकामेश्वर हो गया। रावली महादेव मंदिर भी प्राचीन है। अंग्रेजों ने यहां रेलवे लाइन बिछाने के लिए मंदिरों को शिफ्ट करने का प्रयास किया था लेकिन वहां मंदिर को नहीं हटा सके। उल्टा रेलवे लाइन को शिफ्ट किया गया।
शहर के मध्य में श्री मन:कामेश्वर महादेव मंदिर है। मंदिर के महंत योगेश पुरी के मुताबिक बालकृष्ण के दर्शन करने जाते समय भगवान शिव यहां आए थे। उन्होंने बालकृष्ण के दर्शन की मनोकामना की थी। तभी से भगवान का नाम मनकामेश्वर हो गया। रावली महादेव मंदिर भी प्राचीन है। अंग्रेजों ने यहां रेलवे लाइन बिछाने के लिए मंदिरों को शिफ्ट करने का प्रयास किया था लेकिन वहां मंदिर को नहीं हटा सके। उल्टा रेलवे लाइन को शिफ्ट किया गया।