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लंदन, अमेरिका, कनाडा और पाकिस्तान के 'लबों की शान' को लगा बड़ा झटका
नईमुर्रहमान, अमर उजाला, महोबा
Updated Tue, 12 Jun 2018 06:58 PM IST
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देश-विदेश में मशहूर महोबा का देशावरी पान इन दिनों कुदरत के कहर को झेल रहा है। लू और तेज धूप के चलते पान की फसल बर्बाद हो गई। 'महोबा का पान लबों की शान' को भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने घेर लिया है। करीब 30 फीसदी फसल इसकी चपेट में हैं। माना जा रहा है कि इस बार औषधीय गुणों से भरपूर देशावरी पान का मजा लोगों को मुश्किल से मिलेगा। पिछले कई सालों से पान किसान ओलावृष्टि और पाले से जूझ रहे है। इस साल उनको आस थी कि पान फसल उनको पिछला घाटा पूरा कराएगी। पर बढ़ते तापमान और लू के थपेड़ों ने उनकी उम्मीदों को ठंडा कर दिया। पान फसल को बचाने के लिए दवाओं के प्रयोग के साथ पान किसान तमाम जतन कर रहे हैं। दो दशक पहले महोबा और आसपास के क्षेत्र में लगभग छह सौ एकड़ भूमि में पान की फसल की पैदावार की जाती थी। दो सिमट कर अब 60 एकड़ में रह गई है।
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एक पखवारे से पड़ रही बदन झुलसा देने वाली तेज धूप और लू के थपेड़ों की चपेट में आने से देशावरी पान की फसलें बर्बाद हो गई है। पान बुरी तरह झुलस जाने से 10 लाख रुपये की पान फसल प्रभावित हुई है। इससे करीब एक सैकड़ा पान किसानों को नुकसान हुआ है। इस साल तापमान 49 डिग्री के पार पहुंच जाने से गर्मी के प्रकोप से करीब 30 फीसदी पान बुरी तरह झुलसकर नष्ट हो गया। इससे पान कृषकों को करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इस बार एक पखवारे तक लगातार तापमान बढ़ता रहने से पान झुलसकर बेकार हो गया है। लताओं से सबसे पुराने पत्ते तोड़े जाते हैं जिन्हें पेड़ी का पान कहा जाता है।
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बेहद कड़क और करारेपन के कारण यहां का पान बहुत पसंद किया जाता है। इसी पान को विदेशों में निर्यात किया जाता है। पान किसानों को इसकी अच्छी कीमत मिलती हैं। इस दफा अच्छी फसल देखकर किसान उत्साहित थे लेकिन पारा बढ़ने से पान की लताओं के पत्ते खुद ही टूटकर गिर रहे हैं। हरे भरे रहने वाले पान के पत्ते धीरे धीरे काले पड़ रहे है और मुरझाकर गिर रहे हैं। पान कृषक लालता प्रसाद चौरसिया, सुभाषचंद्र चौरसिया, विनोद चौरसिया, सुंदर लाल चौरसिया का कहना है कि गर्म हवाओं के कारण पान तापमान सहन नहीं कर सका। जिससे पान मुरझाकर गिर रहे हैं। इससे पान कृषकों को भारी नुकसान हो रहा है।
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अमेरिका, लंदन तक जाता है करारा पान
महोबा का देश विदेश में मशहूर देशावरी पान की खपत मेरठ, आगरा, शामली, सहारनपुर, बरेली, बागपत सहित पश्चिमी यूपी के अलावा लंदन, अमेरिका, कनाडा, पाकिस्तान, यूरोप, श्रीलंका, नेपाल, आदि देशों में बेहद करारेपन के लिए पसंद किया जाता है। पान को मुंह में खाते ही यह पान पूरी तरह से घुल जाता है।
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महोबा का देश विदेश में मशहूर देशावरी पान की खपत मेरठ, आगरा, शामली, सहारनपुर, बरेली, बागपत सहित पश्चिमी यूपी के अलावा लंदन, अमेरिका, कनाडा, पाकिस्तान, यूरोप, श्रीलंका, नेपाल, आदि देशों में बेहद करारेपन के लिए पसंद किया जाता है। पान को मुंह में खाते ही यह पान पूरी तरह से घुल जाता है।
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तीन दशक पहले ट्रेन से भेजा जाता था पान
तीन दशक पहले ट्रेन में पान लोड होकर लखनऊ और दिल्ली पहुंचता था। एक दिन में 18 से 20 क्विंटल पान देश विदेश में भेजा जाता था। स्टेशन पर 300 से ज्यादा टोकरे प्रतिदिन ट्रेनों में लोड किए जाते थे। दिल्ली में टोकरे से पान निकालने के बाद बेहतर पैकिंग करके विदेशों में भेजा जाता था। अब हफ्ते में 50-60 टोकरे ही भेजे जाते हैं।
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तीन दशक पहले ट्रेन में पान लोड होकर लखनऊ और दिल्ली पहुंचता था। एक दिन में 18 से 20 क्विंटल पान देश विदेश में भेजा जाता था। स्टेशन पर 300 से ज्यादा टोकरे प्रतिदिन ट्रेनों में लोड किए जाते थे। दिल्ली में टोकरे से पान निकालने के बाद बेहतर पैकिंग करके विदेशों में भेजा जाता था। अब हफ्ते में 50-60 टोकरे ही भेजे जाते हैं।
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