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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में मिले 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग नहीं होगी, पढ़िए कोर्ट ने आदेश में क्या कहा

Fri, 14 Oct 2022 06:39 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 14 Oct 2022 06:39 PM IST
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Gyanvapi case No carbon dating of Shivling inside mosque complex Read Varanasi court order
वाराणसी कोर्ट के बाहर वादी महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान 16 मई को सामने आए शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग खारिज हो गई। शुक्रवार को जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने कथित शिवलिंग की आकृति व आसपास की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक पद्धति से जांच कराने का आवेदन खारिज कर दिया। जिला जज की अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को अपने आदेश में कहा था कि सर्वे में मिले शिवलिंग को सुरक्षित व संरक्षित रखा जाए। ऐसी स्थिति में यदि कार्बन डेटिंग तकनीक का प्रयोग करने पर या जीपीआर पद्धति का प्रयोग करने पर उक्त शिवलिंग को क्षति पहुंचती है तब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा।



इसके अलावा ऐसा होने पर आम जनता की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंच सकती है। शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करने वाली वादी महिलाओं के अधिवक्ता विष्णु जैन ने कहा कि जिला जज के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में जल्द ही चुनौती देंगे। 

Gyanvapi case No carbon dating of Shivling inside mosque complex Read Varanasi court order
वायरल वीडियो की स्क्रीनशॉट - फोटो : सोशल मीडिया।

जिला जज की अदालत ने कहा कि मेरे विचार में इस स्तर पर अधिवक्ता कमिश्नर की कार्यवाही के दौरान मिले कथित शिवलिंग की आयु, प्रकृति और संरचना का निर्धारण करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वे को निर्देश दिया जाना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा उपरोक्त विवेचन के प्रकाश में अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि वादिनी संख्या दो से पांच तक के अधिवक्ता हरिशंकर जैन व विष्णु जैन का प्रार्थनापत्र निरस्त होने योग्य है। ऐसे में कार्बन डेटिंग का आवेदन खारिज किया जाता है। 

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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन - फोटो : अमर उजाला
वादिनी संख्या दो से पांच के अधिवक्ता विष्णु जैन ने कहा कि जिला जज का आदेश सुप्रीम कोर्ट के 20 मई के आदेश का उल्लंघन है। जिसमें ट्रायल कोर्ट को इस वाद से सम्बंधित सभी आवेदनों को निस्तारित करने का अधिकार दिया था। 
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मई-जून में ज्ञानवापी मामला रहा था सुर्खियों में - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कार्बन डेटिंग की सुनवाई के लिए यहां की ट्रायल कोर्ट में आवेदन दिया था। ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने दोनों आदेशों को नजरअंदाज किया है। जिसे हम सुप्रीम कोर्ट में जल्द चुनौती देंगे। वहीं दूसरी तरफ जिला जज ने पक्षकार बनाये जाने के लिए दिए गए आठ आवेदनों में गिरीश उपाध्याय,विजय शंकर रस्तोगी,मुख्तार अहमद समेत चार पर सुनवाई की जबकि चार अन्य पर सुनवाई के लिए 17 अक्तूबर की तिथि नियत कर दी।
 
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मई-जून में ज्ञानवापी मामला रहा था सुर्खियों में - फोटो : अमर उजाला

बीते 20 मई को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में ही कार्बन डेटिंग के लिए आवेदन देने को कहा था। इसी क्रम में जिला जज की अदालत इस आवेदन पर कई तारीखों से सुनवाई कर रही थी। इसका विरोध वादिनी संख्या एक राखी सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने भी किया था।

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