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UP: यूपी के इस 6-लेन एक्सप्रेसवे पर लगा ब्रेक, किसानों ने जमीन देने से किया मना; 2025 में शुरू होना था निर्माण
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 30 Apr 2026 10:30 AM IST
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सार
आगरा-ग्वालियर 6-लेन एक्सप्रेसवे मुआवजे के विवाद में फंस गया है, जिससे प्रोजेक्ट छह महीने पीछे चल रहा है। 279 किसान उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हैं, जिसके कारण भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
88 किमी का बनेगा ग्वालियर- आगरा एक्सप्रेसवे बनेगा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा से ग्वालियर के बीच प्रस्तावित 88 किलोमीटर लंबे 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर मुआवजे के विवाद ने ब्रेक लगा दिए हैं। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अपने तय समय से करीब छह महीने पिछड़ चुका है। जिले में 279 काश्तकार मुआवजे की राशि से असंतुष्ट हैं और उन्होंने फिलहाल भूमि पर कब्जा देने से मना कर दिया है।
प्रोजेक्ट के लिए सदर, खेरागढ़ और फतेहाबाद तहसील के 18 गांवों चिह्नित 121 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अधूरा है। मुआवजे की विसंगतियों को लेकर किसानों ने मध्यस्थता वाद दायर किया था, जिसकी सुनवाई आयुक्त कार्यालय में विचाराधीन है। किसान उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हैं, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू करने के लिए भूमि नहीं मिल पा रही है। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे का निर्माण नवंबर 2025 में शुरू हो जाना था।
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प्रोजेक्ट के लिए सदर, खेरागढ़ और फतेहाबाद तहसील के 18 गांवों चिह्नित 121 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अधूरा है। मुआवजे की विसंगतियों को लेकर किसानों ने मध्यस्थता वाद दायर किया था, जिसकी सुनवाई आयुक्त कार्यालय में विचाराधीन है। किसान उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हैं, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू करने के लिए भूमि नहीं मिल पा रही है। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे का निर्माण नवंबर 2025 में शुरू हो जाना था।
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बीओटी मॉडल पर होना था विकसित
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी-टोल) मॉडल पर विकसित कर रहा है। इसके लिए मेसर्स जीआर इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड के साथ अप्रैल 2025 में अनुबंध हो चुका है। कुल 4613 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की रियायत अवधि 20 वर्ष तय की गई है, जिसमें 30 महीने का निर्माण समय शामिल है। एनएचएआई निर्माण के दौरान 820 करोड़ रुपये की सहायता भी प्रदान करता।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी-टोल) मॉडल पर विकसित कर रहा है। इसके लिए मेसर्स जीआर इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड के साथ अप्रैल 2025 में अनुबंध हो चुका है। कुल 4613 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की रियायत अवधि 20 वर्ष तय की गई है, जिसमें 30 महीने का निर्माण समय शामिल है। एनएचएआई निर्माण के दौरान 820 करोड़ रुपये की सहायता भी प्रदान करता।
चंबल में बनेगा विशेष केबल-स्टे ब्रिज
यह एक्सप्रेसवे आगरा के देओरी गांव से शुरू होकर ग्वालियर के सुसेरा तक जाएगा। मार्ग में चंबल राष्ट्रीय वन्यजीव अभ्यारण्य पड़ने के कारण घड़ियालों के संरक्षण के लिए नदी पर एक अत्याधुनिक केबल-स्टे ब्रिज बनाया जाएगा। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पुल पर ध्वनि और प्रकाश अवरोधक लगाए जाएंगे। परियोजना के तहत 8 बड़े पुल, 23 छोटे पुल और 6 फ्लाईओवर का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे आगरा-ग्वालियर के बीच लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधरेगी।
यह एक्सप्रेसवे आगरा के देओरी गांव से शुरू होकर ग्वालियर के सुसेरा तक जाएगा। मार्ग में चंबल राष्ट्रीय वन्यजीव अभ्यारण्य पड़ने के कारण घड़ियालों के संरक्षण के लिए नदी पर एक अत्याधुनिक केबल-स्टे ब्रिज बनाया जाएगा। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पुल पर ध्वनि और प्रकाश अवरोधक लगाए जाएंगे। परियोजना के तहत 8 बड़े पुल, 23 छोटे पुल और 6 फ्लाईओवर का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे आगरा-ग्वालियर के बीच लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधरेगी।
जल्द होगा निर्णय
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि मध्यस्थता वाद के निस्तारण के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी से रिपोर्ट मांगी है। जल्द निर्णय लेकर वाद का निस्तारण कराया जाएगा।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि मध्यस्थता वाद के निस्तारण के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी से रिपोर्ट मांगी है। जल्द निर्णय लेकर वाद का निस्तारण कराया जाएगा।
भूमि का इंतजार
एनएचएआई के परियोजना निदेशक भरत सिंह ने बताया कि जब तक भूमि पर कब्जा नहीं मिलेगा निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सकता। प्रशासन से पत्राचार किया है। भूमि विवाद हल होने की उम्मीद है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक भरत सिंह ने बताया कि जब तक भूमि पर कब्जा नहीं मिलेगा निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सकता। प्रशासन से पत्राचार किया है। भूमि विवाद हल होने की उम्मीद है।
