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आगरा विश्वविद्यालय: दीक्षांत की फीकी पड़ गई चमक, 170 से घटकर 78 रह गए गोल्ड मेडल; जानें वजह
Fri, 17 Jul 2026 02:04 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 17 Jul 2026 02:04 PM IST
सार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इस बार मेडल की संख्या घटकर 78 रह गई है। मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों के अलग होने से मेधावी छात्रों को पहले की तरह अधिक गोल्ड मेडल नहीं मिल सकेंगे।
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आगरा विश्वविद्यालय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इस बार कम मेडल वितरित किए जाएंगे। अब किसी भी मेधावी को सात से आठ गोल्ड मेडल नहीं मिलेंगे, इसका कारण इंजीनियरिंग के बाद मेडिकल शिक्षा के कॉलेजों का विवि से अलग होना है। दो दशक में विवि में मेडल की संख्या 100 से भी नीचे पहुंच गई है। अब किसी भी मेधावी को अधिकतम तीन से पांच गोल्ड ही मिल सकेंगे।
दीक्षांत समारोह में मेडल वितरण कार्यक्रम सबसे खास होता है। मंच से गोल्ड मेडल मिलना छात्र-छात्राओं को गर्व का अनुभव कराता है। हालांकि, इस बार के दीक्षांत समारोह में सोने की चमक फीकी नजर आएगी। इसकी वजह मेडल की संख्या कम होना है। दो दशक पहले दीक्षांत समारोह में करीब 170 मेडल वितरित किए जाते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 78 रह गई है। इस बार करीब 20 से 25 मेडल मेडिकल शिक्षा के कम हो गए हैं।
अब तक सबसे अधिक मेडल मेडिकल के ही मेधावी प्राप्त करते आए हैं। इस बार तस्वीर बदली नजर आएगी। इसके साथ विवि ने कुछ ही छात्रों को मंच से मेडल देने का नियम बनाया है। इससे मेडल पाने वालों के चेहरों पर रौनक कम नजर आएगी। प्रभारी, मेडल समिति प्रो. मनु प्रताप ने बताया कि मेडल सूची तैयार कराने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस बार विवि से संबद्ध प्रमुख महाविद्यालयों के साथ आवासीय संस्थानों के छात्रों को भी मेडल प्रदान किए जाएंगे। - ,
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संस्थानों की संख्या बढ़ी मेडल की नहीं
पिछले एक दशक में विवि से संबद्ध वित्तविहीन संस्थानों की संख्या बढ़ी है लेकिन मेडल की नहीं। नए मेडल बढ़ाने की दिशा में विवि की तरफ से कोई प्रयास देखने को नहीं मिला है। इसी का नतीजा है कि मेडल संख्या कम होती जा रही है। वर्तमान में विवि से साढ़े पांच सौ से अधिक वित्तविहीन विद्यालय संबद्ध हैं, जबकि महाविद्यालयों की संख्या स्थिर बनी हुई है।
मेडल सूची नहीं हो पा रही तैयार
दीक्षांत समारोह के लिए मेडल सूची तैयार नहीं हो पा रही है। इसकी वजह कई पाठ्यक्रमों का परीक्षाफल घोषित नहीं होना है। ऐसे में विवि प्रशासन पर परीक्षाफल जल्द घोषित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आवासीय संस्थानों के 70 फीसदी से अधिक परीक्षाफल अटके हुए हैं।
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दीक्षांत समारोह में मेडल वितरण कार्यक्रम सबसे खास होता है। मंच से गोल्ड मेडल मिलना छात्र-छात्राओं को गर्व का अनुभव कराता है। हालांकि, इस बार के दीक्षांत समारोह में सोने की चमक फीकी नजर आएगी। इसकी वजह मेडल की संख्या कम होना है। दो दशक पहले दीक्षांत समारोह में करीब 170 मेडल वितरित किए जाते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 78 रह गई है। इस बार करीब 20 से 25 मेडल मेडिकल शिक्षा के कम हो गए हैं।
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अब तक सबसे अधिक मेडल मेडिकल के ही मेधावी प्राप्त करते आए हैं। इस बार तस्वीर बदली नजर आएगी। इसके साथ विवि ने कुछ ही छात्रों को मंच से मेडल देने का नियम बनाया है। इससे मेडल पाने वालों के चेहरों पर रौनक कम नजर आएगी। प्रभारी, मेडल समिति प्रो. मनु प्रताप ने बताया कि मेडल सूची तैयार कराने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस बार विवि से संबद्ध प्रमुख महाविद्यालयों के साथ आवासीय संस्थानों के छात्रों को भी मेडल प्रदान किए जाएंगे। - ,
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संस्थानों की संख्या बढ़ी मेडल की नहीं
पिछले एक दशक में विवि से संबद्ध वित्तविहीन संस्थानों की संख्या बढ़ी है लेकिन मेडल की नहीं। नए मेडल बढ़ाने की दिशा में विवि की तरफ से कोई प्रयास देखने को नहीं मिला है। इसी का नतीजा है कि मेडल संख्या कम होती जा रही है। वर्तमान में विवि से साढ़े पांच सौ से अधिक वित्तविहीन विद्यालय संबद्ध हैं, जबकि महाविद्यालयों की संख्या स्थिर बनी हुई है।
मेडल सूची नहीं हो पा रही तैयार
दीक्षांत समारोह के लिए मेडल सूची तैयार नहीं हो पा रही है। इसकी वजह कई पाठ्यक्रमों का परीक्षाफल घोषित नहीं होना है। ऐसे में विवि प्रशासन पर परीक्षाफल जल्द घोषित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आवासीय संस्थानों के 70 फीसदी से अधिक परीक्षाफल अटके हुए हैं।