पांच बैनामों में पौने दो करोड़ के स्टांप गायब

पांच बैनामों में पौने दो करोड़ के स्टांप गायब Updated Sun, 26 Feb 2017 01:26 AM IST
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स्टाम्प पेपर - फोटो : फोटो- ट्विटर
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स्टांप हेराफेरी की फाइलें खुलने के बाद बड़े मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला दो कंपनियों द्वारा कराए गए पांच बैनामों में स्टांप जमा न करने का खुला है। दोनों कंपनियों ने कर्मचारियों की मिलीभगत से लगभग पौने दो सौ करोड़ रुपये के स्टांप लगाए बिना ही बैनामा करा लिए। फाइल तलब होने के डर से कर्मचारियों ने क्रेताओं को बैनामा नहीं दिया। साथ ही नोटिस भी भेज दिया। कोई जवाब न मिलने पर मामला एडीएम वित्त एवं राजस्व राकेश मालपाणी तक पहुंचा। जहां से स्टांप वसूली के आदेश के लिए फाइल जिलाधिकारी के लिए भेज दी गई है।
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पहला मामला सदर तहसील का है। ब्राह्माणी रियल एस्टेट कंपनी ने एक जमीन बाबरपुर और दो जमीनें ककरैठा में लीं। इनका बैनामा कराया गया। इसमें प्रत्येक बैनामा पर 30.58 लाख रुपये के स्टांप लगने थे। जोकि नहीं लगाए गए। इनकी कीमत लगभग 91.74 लाख रुपये थी। दूसरा मामला एत्मादपुर तहसील का है। यहां इंदू ह्यूमर्स कंपनी ने कुबेरपुर में दो जमीनों के बैनामा कराए। इसमें प्रत्येक में 39.48 लाख रुपये के स्टांप लगने थे लेकिन क्रेताओं ने नहीं लगाए। दोनों बैनामों में लगभग 78.86 लाख रुपये के स्टांप लगने थे। कर्मचारियों ने मिलीभगत से बैनामा तो कर दिए लेकिन भविष्य में फाइल खुलने के डर से क्रेताओं को बैनामा नहीं दिया। इस बीच निबंधन विभाग की ओर से क्रेताओं को नोटिस भी जारी किए गए। मगर, उन्होंने तो स्टांप शुल्क जमा किया और न ही नोटिस का जवाब दिया। इस पर मामला एडीएम वित्त एवं राजस्व राकेश मालपाणी तक पहुंचा गया। चूंकि बड़े बैनामों के विवाद का निस्तारण जिलाधिकारी के स्तर से होता है इसलिए उन्होंने स्टांप वसूली के अग्रिम आदेश के लिए इस फाइल को उनके पास पहुंचा दिया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व के अनुसार, स्टांप में गड़बड़ी के कुछ मामले सामने आए हैं। इनके निस्तारण के लिए फाइलें जिलाधिकारी के यहां भिजवाई गई हैं।

इनसेट
चार करोड़ की जमीन में 16 लाख का स्टांप घोटाला
स्टांप घोटाले का एक और मामले का खुलासा किरावली तहसील अंतर्गत हुआ है। यहां पुरामना में गाटा संख्या 605 रकवा 0.7110 हेक्टेयर यानी 7110 वर्गमीटर का बैनामा हुआ। इसमें सिर्फ 3.42 लाख रुपये के स्टांप लगाए गए। बाद में सहायक महानिरीक्षक निबंधन/सहायक आयुक्त स्टांप निरंजन कुमार ने जमीन का भौतिक निरीक्षण किया। उनकी जांच रिपोर्ट के अनुसार, उक्त जमीन की कीमत सर्किल रेट के अनुसार 3.91 करोड़ रुपये है। इसके बैनामा में 19.55 लाख रुपये के स्टांप लगने थे। मगर, इसमें सिर्फ 3.42 लाख रुपये के ही स्टांप लगाए गए। जांच में 16.13 लाख रुपये स्टांप की कमी पाई गई। इसकी वसूली के लिए सहायक महानिरीक्षक निबंधन की जांच रिपोर्ट के आधार पर एडीएम वित्त एवं राजस्व ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है।
इनसेट
भू उपयोग परिवर्तन में हो रहा ‘खेल’
बैनामों में भू उपयोग परिवर्तन का ‘खेल’ जमकर खेला जा रहा है। किरावली तहसील के मामले में भी भू उपयोग का दुरुपयोग हुआ। अकृषक भूमि को कृषि भूमि दिखाकर कम रेट पर बैनामा कराए जा रहे हैं। बाद में इन जमीनों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जाती हैं। 

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