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UP: पर्यटकों के लिए शुरू हुई बाइक कैब योजना को नहीं मिली रफ्तार, मथुरा काफी आगे; इसलिए पिछड़ गया आगरा
Fri, 17 Jul 2026 11:28 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 17 Jul 2026 11:28 AM IST
सार
पर्यटकों की सुविधा के लिए शुरू की गई बाइक कैब योजना आगरा में अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सकी, जबकि मथुरा इस मामले में काफी आगे निकल गया है। आगरा में केवल 20 बाइक कैब संचालित हो रही हैं, जबकि मथुरा में इनकी संख्या 115 पहुंच गई है।
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बाइक कैब योजना
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पर्यटन उद्योग को बढ़ावा और पर्यटकों की सुविधा के लिए शासन के स्तर से बाइक कैब योजना प्रारंभ की गई। बाइक कैब मामले में आगरा से आगे मथुरा निकल गया। प्रचार-प्रसार का अभाव होने की वजह से अधिक लोग योजना से नहीं जोड़े जा सके। मंडल में आगरा और मथुरा जिले में बाइक कैब की सुविधा पर्यटकों को मिल रही है।
संभागीय परिवहन विभाग की तरफ से पर्यटकों को सुगम परिवहन उपलब्ध कराने के लिए कई योजना संचालित की गई। यह बात अलग है कि कई योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई। बाइक कैब के माध्यम से पर्यटकों को आसानी से स्मारक और होटलों तक पहुंचाने की योजना तैयार की गई। कोई पर्यटक अकेला आता है, तो उसके लिए बाइक कैब सबसे अच्छा और सस्ता साधन साबित हो सकता है।
माना जा रहा है कि प्रशासन और आरटीओ की तरफ से योजना को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। उसी का नतीजा है कि आगरा में मात्र 20 बाइक कैब संचालित की जा रही हैं। जबकि मथुरा में इनकी संख्या 115 है। मंडल के अन्य जिले फिरोजाबाद और मैनपुरी में बाइक कैब की सुविधा नहीं है। बाइक कैब की संख्या बढ़ने से आरटीओ को भी अच्छा राजस्व प्राप्त हो सकता है।
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चालक और गाइड नहीं बन सकी महिलाएं
संभागीय परिवहन विभाग की तरफ से पर्यटकों की सुविधा के लिए पिंक ऑटो चलाने की योजना तैयार की थी। इस ऑटो की कमान महिला चालक के हाथ होनी थी। महिला चालक को चालक के साथ गाइड का काम भी करना था। इसके लिए आरटीओ के स्तर से ऑटो परमिट जारी होने थे लेकिन यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।
कम आवेदन आए, बढ़ाने का होगा प्रयास
एआरटीओ (प्रशासन) विनय कुमार सिंह ने बताया कि बाइक कैब के लिए आवेदन करने पर परमिट जारी किया जाता है। कम आवेदन आने की वजह से संख्या नहीं बढ़ रही है। इसके लिए प्रयास किया जाएगा।
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संभागीय परिवहन विभाग की तरफ से पर्यटकों को सुगम परिवहन उपलब्ध कराने के लिए कई योजना संचालित की गई। यह बात अलग है कि कई योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई। बाइक कैब के माध्यम से पर्यटकों को आसानी से स्मारक और होटलों तक पहुंचाने की योजना तैयार की गई। कोई पर्यटक अकेला आता है, तो उसके लिए बाइक कैब सबसे अच्छा और सस्ता साधन साबित हो सकता है।
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माना जा रहा है कि प्रशासन और आरटीओ की तरफ से योजना को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। उसी का नतीजा है कि आगरा में मात्र 20 बाइक कैब संचालित की जा रही हैं। जबकि मथुरा में इनकी संख्या 115 है। मंडल के अन्य जिले फिरोजाबाद और मैनपुरी में बाइक कैब की सुविधा नहीं है। बाइक कैब की संख्या बढ़ने से आरटीओ को भी अच्छा राजस्व प्राप्त हो सकता है।
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चालक और गाइड नहीं बन सकी महिलाएं
संभागीय परिवहन विभाग की तरफ से पर्यटकों की सुविधा के लिए पिंक ऑटो चलाने की योजना तैयार की थी। इस ऑटो की कमान महिला चालक के हाथ होनी थी। महिला चालक को चालक के साथ गाइड का काम भी करना था। इसके लिए आरटीओ के स्तर से ऑटो परमिट जारी होने थे लेकिन यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।
कम आवेदन आए, बढ़ाने का होगा प्रयास
एआरटीओ (प्रशासन) विनय कुमार सिंह ने बताया कि बाइक कैब के लिए आवेदन करने पर परमिट जारी किया जाता है। कम आवेदन आने की वजह से संख्या नहीं बढ़ रही है। इसके लिए प्रयास किया जाएगा।