कारतूसों की काली सप्लाई: मिलीभगत या फिर निगरानी में चूक, हर अपराध में मिल रहे अवैध कारतूस
अवैध कारतूसों के कई संभावित स्रोत हो सकते हैं। लाइसेंसी हथियार की दुकानों से चोरी-छिपे बिना अनुमति कारतूस बेचे जा सकते हैं। दूसरे जिलों व राज्यों से तस्करी के जरिये भी कारतूस जिले में आ रहे हैं। यह भी संभव है कि कहीं गुप्त रूप से कारतूसों का अवैध निर्माण हो रहा हो।
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कमजोर निगरानी और अपराधियों की सिस्टम में सांठगांठ से अवैध कारतूसों की आपूर्ति धड़ल्ले से हो रही है। यह बात जिले में आए दिन अवैध कारतूसों की धरपकड़ से सामने आ रहा है। लाइसेंसी हथियारों पर कारतूस बिक्री के सख्त नियम लागू हैं। इसके बावजूद अवैध हथियारों को रखने वालों तक अवैध कारतूस पहुंचना बड़ा सवाल हैं।
हथियार लाइसेंस लेने और कारतूस खरीदने की प्रक्रिया अब बेहद जटिल है। नए आर्म्स अधिनियम के तहत बिना प्रशासनिक अनुमति और पुलिस रिपोर्ट के कारतूस नहीं मिलते। पुराने खर्च किए गए कारतूसों का साक्ष्य सहित ब्योरा भी देना होता है। इसके बावजूद अवैध कारतूस बाजार में धड़ल्ले से मिल रहे हैं। शहर से लेकर जिले तक में हर दूसरे दिन होने वाली गोलीबारी इसकी गवाही देती है। पुलिस की धरपकड़ में भी अपराधियों के पास से अवैध कारतूस मिलना आम बात है। जिले में करीब 37 हजार लाइसेंसी शस्त्र हैं। पुलिस की अनुमति से छह माह में 900 कारतूस बिके हैं। वहीं, जिला पुलिस ने एक वर्ष में करीब 400 कारतूस बरामद किए हैं। एक वर्ष में आर्म्स अधिनियम के तहत 240 अपराध दर्ज किए गए हैं। इस दौरान 283 अवैध हथियार भी बरामद हुए हैं।
अवैध कारतूसों के संभावित स्रोत
अवैध कारतूसों के कई संभावित स्रोत हो सकते हैं। लाइसेंसी हथियार की दुकानों से चोरी-छिपे बिना अनुमति कारतूस बेचे जा सकते हैं। दूसरे जिलों व राज्यों से तस्करी के जरिये भी कारतूस जिले में आ रहे हैं। यह भी संभव है कि कहीं गुप्त रूप से कारतूसों का अवैध निर्माण हो रहा हो। पुराने या निष्क्रिय लाइसेंसों का दुरुपयोग भी एक बड़ा कारण हो सकता है। सत्यापन प्रक्रिया में खामियां भी अनधिकृत व्यक्तियों को कारतूस दिला सकती हैं। पलवल पुलिस की ओर से सोनू बाजौता के घर से भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए। पिछले माह सिविल लाइंस में सक्रिय एएमयू छात्रों के गुट से भी भारी मात्रा में कारतूस मिले थे।
निगरानी में जुटी पुलिस, 20 फीसदी काम शेष
सख्त नियमों के बावजूद अपराधियों तक अवैध कारतूसों का पहुंचना चिंताजनक है। यह वर्तमान निगरानी तंत्र में गंभीर खामियों को दर्शाता है। सत्यापन प्रक्रिया उतनी प्रभावी नहीं हो सकती जितनी होनी चाहिए। इसे लेकर जिला स्तर पर शस्त्र लाइसेंसों का पुलिस द्वारा नए सिरे से सत्यापन कराया जा रहा है। इस अभियान में अभी 20 फीसदी लाइसेंसों का सत्यापन शेष है। कुछ लाइसेंसी ऐसे भी सामने आए हैं, जो जिले से बाहर चले गए हैं। पुलिस अब उनके नए पते की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य हर हथियार धारक का विवरण पुलिस के पास रखना है। इससे अवैध कारतूसों की निगरानी और बढ़ाई जा सकेगी।
जिस घर में मिला अवैध कारतूस-हथियार, पूरा परिवार जिम्मेदार
पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने बताया कि उनकी टीमें लगातार इस दिशा में निगरानी कर रही हैं। इसी का परिणाम है कि लगातार अवैध कारतूस व हथियार पकड़े जाते हैं। आर्म्स अधिनियम की धारा 35-1959 के तहत यह प्रावधान है कि जिस घर में अवैध हथियार व कारतूस मिलता है, वह पूरा परिवार जिम्मेदार होता है। परिवार के सभी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। इस दिशा में सख्ती बरतने के लिए अब इस कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। पुलिस कारतूस आने की कड़ी में तीसरी व चौथी परत तक पहुंचने का प्रयास करेगी। इसका लक्ष्य अवैध कारतूसों की आमद को पूरी तरह रोकना है।
इन आंकड़ों पर नजर डालिये
- 37 हजार के करीब लाइसेंसी शस्त्र हैं जिले में
- 900 कारतूस पुलिस की अनुमति से छह माह में बिके
- 400 के करीब कारतूस एक वर्ष में जिला पुलिस ने किए बरामद
- 240 अपराध आर्म्स एक्ट में एक वर्ष में किए गए जिले में दर्ज
- 283 अवैध हथियार इस आर्म्स एक्ट के तहत किए हैं बरामद