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जहर बनता भूजल: अलीगढ़ में फ्लोराइड, वाराणसी समेत पूर्वी यूपी में मिले यूरेनियम के अंश, ये आंकड़े हैं चिंताजनक

बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 23 Mar 2026 03:25 PM IST
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सार

रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ सहित 11 जिलों में लवणता, 24 जिलों में फ्लोराइड और 14 जिलों में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक दर्ज की गई है। वहीं वाराणसी, सोनभद्र, अमरोहा और उन्नाव समेत 22 जिलों में यूरेनियम के अंश मिलने से स्थिति और गंभीर हो गई है।

Disclosure in CSIR and IITR report
भूजल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश में भूजल की गुणवत्ता पर सामने आए ताजा आंकड़े गंभीर चेतावनी दे रहे हैं। राज्य के कई जिलों में पीने के पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट और यहां तक कि यूरेनियम जैसे तत्व निर्धारित मानकों से अधिक पाए गए हैं।

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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) की रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ सहित 11 जिलों में लवणता, 24 जिलों में फ्लोराइड और 14 जिलों में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक दर्ज की गई है। वहीं वाराणसी, सोनभद्र, अमरोहा और उन्नाव समेत 22 जिलों में यूरेनियम के अंश मिलने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
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रिपोर्ट बताती है कि 48 जिलों में नाइट्रेट और 46 जिलों में आयरन की अधिकता दर्ज की गई है, जबकि 26 जिलों में मैंगनीज भी मानक से ऊपर पाया गया। बदायूं और चंदौली में सीसा भी सीमा के करीब पहुंच गया है। यह मामला संसद तक भी पहुंच चुका है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में राज्य के भूजल की वास्तविक समय निगरानी और प्रबंधन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की है।

औद्योगिक क्षेत्रों के पास बढ़ रहा दबाव
सीएसआईआर-नीरी के मूल्यांकन में मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, आगरा और मथुरा के औद्योगिक क्षेत्रों के पास भूजल के नमूनों की जांच की गई। यमुना और हिंडन नदी के किनारे लिए गए बोरवेल नमूनों में भारी धातुओं की मौजूदगी दर्ज की गई, हालांकि ये बीआईएस मानकों के भीतर पाई गई। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि औद्योगिक अपशिष्ट और शहरी विस्तार का दबाव लगातार भूजल की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।

भूजल बढ़ा, लेकिन सुरक्षित नहीं
केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 के 69.92 अरब घन मीटर से बढ़कर 2025 में 73.39 अरब घन मीटर हो गया है। इसके बावजूद भूजल दोहन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2017 में 70.18% के मुकाबले 2025 में भूजल उपयोग 70% पर है। यानी पानी बढ़ा जरूर है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित उपलब्धता पर सवाल खड़े हैं।

अलीगढ़ में स्थिति ज्यादा संवेदनशील
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक अपशिष्ट और भारी धातुएं भूजल को तेजी से दूषित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के पानी में कई तत्वों के साथ जिंक की मात्रा भी बढ़ी है। अगर अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

यह उठाए कदम

  • गंगा क्षेत्र में सीमेंट-सीलिंग तकनीक का उपयोग कर 294 भूजल निगरानी कुएं बनाए गए।
  • फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में मिश्रित जल आपूर्ति और ट्रीटमेंट प्लांट।
  • नाइट्रेट नियंत्रण के लिए उर्वरक प्रबंधन और मृदा परीक्षण।
  • यूरेनियम के लिए आरओ, सोखना और निष्कर्षण तकनीक।
  • सीसा और भारी धातुओं के लिए फिल्ट्रेशन सिस्टम की स्थापना।
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