Gulveer Singh: गुलवीर ने ग्लासगो से किए अपने गुरु के दर्शन, बचपन में ही लग गया था गुल्लू करेगा कमाल
गुलवीर के बड़े भाई ने बताया कि पिछले नौ महीने से वह घर नहीं आया है। बीती 21 फरवरी को छोटी बहन पूजा की शादी में भी खेल की तैयारियों के कारण नहीं आ सका। बहन पूजा ने भाई के बिना शादी करने से इन्कार कर दिया था। बहन की जिद पर गुलवीर फेरे पड़ने तक आने की सांत्वना देता रहा।
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गुलवीर सिंह ने पदक जीतने के बाद बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दोस्त को वीडियो काॅल कर अपने गुरु उड़िया बाबा के दर्शन किए। गुलवीर ने दोस्त आकाश चौधरी के माध्यम से वीडियो कॉल के जरिये गांव के लोगों से भी बात की। उन्होंने पदक जीतने का श्रेय गुरु उड़िया बाबा को समर्पित किया।
आकाश चौधरी ने बताया कि गुलवीर ने गांव भुड़िया स्थित लालाराम श्री देवी इंटर कॉलेज से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उन्होंने छर्रा के रुद्रास कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में दाखिला लिया। वर्ष 2017 में बीए प्रथम वर्ष पास करने के बाद ही उनकी सेना में नौकरी लग गई थी। सेना में रहते हुए उन्होंने वर्ष 2022-23 में एशियन गेम्स में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक प्राप्त किया था। उनकी 98 वर्षीय दादी गैंदो देवी ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उनके गुल्लू ने देश का नाम बढ़ाया है।
सिरसा गांव में खेतों की पगडंडियों पर दौड़कर अंतरराष्ट्रीय धावक बनने का सपना देखने वाले गुलवीर अब सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़कर देश के लिए पदक जीत रहे हैं। बचपन में गुलवीर गांव की पगडंडियों पर दौड़ते थे। गांव के लोगों ने कहा कि गुल्लू की ललक देख लगता था कि वह एक दिन कमाल करेगा। पड़ोसी बनवारी लाल ने बताया कि गांव के लोग आज भी याद करते हैं कि बचपन में गुल्लू घर से घेर और खेतों तक बिना थके दौड़ता रहता था। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही बालक एक दिन अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर भारत के लिए पदक जीतेगा।
गुलवीर का बचपन अभावों के बीच बीता लेकिन सपनों की रफ्तार कभी धीमी नहीं हुई। वर्ष 2018 में भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद उनकी प्रतिभा को सही दिशा मिली। सेना की खेल सुविधाओं, आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय शिविर में मिले प्रशिक्षण ने उन्हें विश्वस्तरीय धावक बना दिया। गुलवीर की उपलब्धियों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने पहले 5,000 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया फिर अमेरिका के ट्रैक फेस्ट में 10,000 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित कर भारतीय एथलेटिक्स में नया अध्याय लिखा।
जापान के नीगाटा और अमेरिका के बोस्टन व पोर्टलैंड में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई राष्ट्रीय कीर्तिमान अपने नाम किए। इससे पहले हांगझाऊ एशियन गेम्स में 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया था। उनकी उपलब्धियों के सम्मान में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें 75 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की।
गांव में खुशी की लहर, गुलवीर सिंह को दी बधाई
एक बार फिर से गुलवीर ने देश के साथ ही जिला एवं गांव का नाम रोशन किया है।-सुमित चौधरी, ग्राम प्रधान का बेटा
अतरौली की धरती के बेटे नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने रजत पदक जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। उन्होंने साबित कर दिया कि लगन सच्ची हो तो गांव की मिट्टी से भी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है। - संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री।
गुलवीर सिंह की उपलब्धि हर उस युवा के लिए संदेश है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है। अनुशासन, समर्पण और देश के प्रति निष्ठा के कारण ही आज गुलवीर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमके हैं। मेरी दिल से शुभकामनाएं हैं कि वे आगे भी देश के लिए और पदक जीतें। - राजवीर सिंह राजू, पूर्व मंत्री।
मुझे गर्व है कि मेरे क्षेत्र सिरसा के लाल चौधरी गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। सेना में रहते हुए भी खेल के प्रति उनका जज्बा और देश सेवा का जुनून काबिल-ए-तारीफ है। अतरौली को आप पर गर्व है मेरे शेर। - चौधरी ऋषिपाल सिंह, एमएलसी
गुलवीर सिंह ने एक बार फिर कमाल कर दिया। ग्लासगो में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। -शमशाद निसार आजमी, उपाध्यक्ष, यूपी एथलेटिक्स संघ।
0.85 सेकंड से फिसला स्वर्ण पदक
ग्लासगो में गुलवीर ने 10,000 मीटर की दौड़ 27 मिनट 49.78 सेकंड में पूरी कर रजत पदक अपने नाम किया। स्वर्ण पदक जीतने वाले ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन उनसे महज 0.85 सेकंड आगे रहे। यह रजत पदक भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ क्योंकि इस स्पर्धा में 16 वर्षों बाद कोई भारतीय एथलीट राष्ट्रमंडल स्तर पर पदक जीत सका। इससे पहले वर्ष 2010 में कविता राउत ने कांस्य पदक जीता था।
बेटा देश नाम रोशन करता रहे
पप्पू गुलवीर सिंह के पिता पप्पू सिंह ने कहा कि गुलवीर सिंह लगातार देश का नाम रोशन कर रहा है। वह इसी तरह पदक जीतता रहे। कोरोना काल में गुलवीर सिंह की शादी हुई थी। मां ने गुलवीर की सफलता पर खुशी जताई। गुलवीर की दो बेटियां परी (2 वर्ष) और सवी (11 माह) की हैं। सवी के जन्म पर तैयारियों के चलते मात्र दो घंटे के लिए बेटी को देखने आए थे। गुलवीर की पत्नी बबिता देवी ने कहा कि पति के पदक जीतने पर वह काफी खुश हैं। देश सेवा के साथ वह आगे भी इसी तरह पदक जीतते रहें।
बहन की शादी में भी गुलवीर नहीं हो सके शामिल
गुलवीर के बड़े भाई मोनू चौधरी ने बताया कि पिछले नौ महीने से वह घर नहीं आया है। बीती 21 फरवरी को छोटी बहन पूजा की शादी में भी खेल की तैयारियों के कारण नहीं आ सका। बहन पूजा ने भाई के बिना शादी करने से इन्कार कर दिया था। बहन की जिद पर गुलवीर फेरे पड़ने तक आने की सांत्वना देता रहा। फेरे पड़ने के बाद ही गुलवीर ने शादी में नहीं आने की वजह बताई।
सेना में भर्ती के दौरान भी दौड़ में तोड़ा था रिकॉर्ड
गुलवीर के दोस्त आकाश ने बताया कि सेना में भर्ती के दौरान गुलवीर सिंह ने 1600 मीटर की दौड़ मात्र 04 मिनट 39 सेकंड में पूरी की थी जो आज भी रिकॉर्ड है। एमएलसी ने एशियन पदक विजेता के नाम से गांव में द्वार का निर्माण कराया है।
पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू भूले अपना वादा, नहीं बनवाया स्टेडियम
एशियन गेम्स में पदक जीतने के बाद वर्ष 2023 में सम्मानित करने पहुंचे पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू भैया से धावक गुलवीर सिंह ने युवाओं के लिए गांव में स्टेडियम बनाने की मांग रखी थी। राजू भैया ने स्टेडियम बनवाने का आश्वासन दिया था लेकिन तीन वर्ष बाद भी स्टेडियम की मांग पर कोई विचार तक नहीं किया गया।
दादी बोलीं- मेरे गुल्लू ने बढ़ायो ऐ देश कौ नाम, घर आवैगो तो खूब नाचूंगी
छर्रा। मेरे गुल्लू ने देश कौ नाम बढ़ायो ऐ, जब घर आवैगो तो वाके संग खूब नाच-गायकै खुशी मनाऊंगी। गुल्लू के साथ मेरो पूरौ आशीर्वाद है। खूब करैगो तरक्की, देश को नाम और ज्यादा रोशन करैगो। यह भाव भरे शब्द 98 वर्षीय दादी गैंदो देवी के रहे।
पदक जीतने के बाद किसी राजनीतिज्ञ ने नहीं दी बधाई
रजत पदक जीतने के बाद एमएलसी, विधायक, सांसद, मंत्री या कोई अन्य राजनीतिज्ञ परिजनों के पास बधाई तक देने नहीं पहुंचा है। सभी नेताओं ने सोशल मीडिया पर चित्र लगाकर औपचारिकताएं पूरी कर दीं।