Prayagraj : रिश्वत के आरोपों के बीच एसडीएम के सामने रख दी नोटों की गड्डी, तहसील में मचा हड़कंप
संगम नगरी की सदर तहसील में शुक्रवार को आयोजित जनता दर्शन के दौरान उस समय एक बेहद अजीब और हैरान करने वाली स्थिति पैदा हो गई, जब एक व्यक्ति एसडीएम के सामने सीधे नोटों की गड्डी लेकर पहुंच गया।
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संगम नगरी की सदर तहसील में शुक्रवार को आयोजित जनता दर्शन के दौरान उस समय एक बेहद अजीब और हैरान करने वाली स्थिति पैदा हो गई, जब एक व्यक्ति एसडीएम के सामने सीधे नोटों की गड्डी लेकर पहुंच गया। उस व्यक्ति ने बिना किसी झिझक के अधिकारी की टेबल पर रुपये रखते हुए तंजिया लहजे में कहा कि लेखपाल 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है, अगर काम कराने की यही व्यवस्था है तो ये रुपये मैं आपके सामने ही दे रहा हूं, कृपया मेरा काम करा दीजिए। इस अप्रत्याशित घटना से कुछ देर के लिए तहसील परिसर में मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और अपनी फरियाद लेकर आए आम लोग पूरी तरह सन्न रह गए।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को एसडीएम सदर अंकित वर्मा जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी बीच वहां पहुंचे एक व्यक्ति ने अपनी जेब से नोटों का बंडल निकालकर सीधे टेबल पर रख दिया। आरोप लगाया कि एक व्यक्ति ने उनसे जमीन की पैमाइश कराने का अनुरोध किया था। इलाके में भूमाफिया के सक्रिय होने के चलते दूसरे क्षेत्र के दो लेखपाल को पैमाइश की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि दोनों लेखपालों ने रिपोर्ट लगाने के एवज में एक लाख रुपये की मोटी रकम मांगी थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि पीड़ित ने इतनी बड़ी राशि एक साथ देने में असमर्थता जताई थी, जिसके बाद रविवार को डीएम कार्यालय के गेट के सामने 50 हजार रुपये की पहली किस्त दी गई। इसके बाद शुक्रवार की सुबह करीब 8:53 बजे उनके मोबाइल पर कॉल कर बाकी के 50 हजार रुपये तुरंत भेजने का दबाव बनाया गया।
एसडीएम सदर ने दो लेखपाल को किया तलब, दोनों ने आरोपों को किया खारिज
इस मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर ने तुरंत संबंधित लेखपाल को मौके पर तलब किया और इन गंभीर आरोपों पर जवाब-तलब किया। हालांकि, आरोपी लेखपाल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और झूठा बताया। एसडीएम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की जांच तहसीलदार को सौंप दी। कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और यदि रिश्वत मांगने का आरोप सही पाया जाता है, तो दोषी कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार बेहद सख्त कदम उठाया जाएगा। उधर, शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से भी की है।