UP : हाईकोर्ट सख्त- अधिवक्ता पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश
Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायालय पर सरकार के दबाव में काम करने और संबंधित विवेचक से स्पष्टीकरण मांगने का साहस नहीं होने का आरोप लगाने वाले अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायालय पर सरकार के दबाव में काम करने और संबंधित विवेचक से स्पष्टीकरण मांगने का साहस नहीं होने का आरोप लगाने वाले अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने अधिवक्ता के आचरण को अत्यंत आपत्तिजनक, न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और निंदनीय बताया।
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने दलील दी कि उसके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। मामले में घायल व्यक्ति को सीने में गोली लगने की चोट आई थी। 19 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद विवेचक ने अब तक घायल का बयान दर्ज नहीं किया है। इस पर कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही पूरा चिकित्सीय अभिलेख, चोट का विवरण और घायल व डॉक्टर के बयान भी प्रस्तुत करने के लिए कहा। मामले को 10 मार्च 2026 को पुनः सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
कोर्ट के आदेश लिखवाने के तुरंत बाद अधिवक्ता ने खुली अदालत में ऊंची आवाज में आपत्ति जताई। कहा,आप मामले में जवाबी हलफनामा क्यों मांग रहे हैं। संबंधित विवेचक से स्पष्टीकरण मांगने का आप में साहस नहीं है। आपको विवेचक के खिलाफ कोई आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि आप सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आचरण न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने की स्पष्ट मंशा दर्शाता है। यह न्यायालय की छवि धूमिल करने का प्रयास है।