जूनियर डॉक्टर की पिटाई से नाराज और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हड़ताल पर रहे साथियों की वजह से स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) की स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं। मंगलवार रात नौ से बुधवार दोपहर एक बजे तक ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीज नहीं लिए गए। ओपीडी में मात्र 136 मरीज ही देखे गए जबकि करीब तीन हजार लोगों का रोज उपचार होता है। वहीं, दोपहर एक बजे के बाद एडीएम सिटी के कार्रवाई के आश्वासन पर हड़ताल समाप्त हुई तो मरीजों ने राहत की सांस ली। सर्जरी विभाग के जूनियर डॉक्टर आलोक कुमार को सोमवार रात कुछ लोगों ने जॉर्जटाउन स्थित उनके फ्लैट पर पीट दिया था। पुलिस ने केस दर्ज करने में 24 घंटे से ज्यादा लगा दिया तो साथियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा गया। वे मंगलवार रात नौ बजे से हड़ताल पर चले गए।
रात नौ बजे के बाद से अगली दोपहर एक बजे तक एक दर्जन से अधिक गंभीर मरीजों को वापस ट्रॉमा सेंटर के गेट से वापस कर दिया गया।बैरिकेडिंग कर ट्रॉमा सेंटर अनिश्चितकाल तक बंद है का पर्चा लगाकर हड़ताल शुरू दी। इससे ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में सन्नाटा रहा। गंभीर मरीजों को जूनियर डॉक्टरों ने तेज बहादुर सप्रू अस्पताल और मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय जाने की सलाह दी। करीब 16 गंभीर मरीज रेफर होकर छावनी सामान्य अस्पताल उपचार कराने पहुंचे।
इनमें से अधिकांश सांस से संबंधित रहे। इतना ही नहीं, हड़ताल का असर बुधवार को ओपीडी पर पड़ा। सुबह आठ से साढ़े आठ बजे तक मात्र 136 मरीजों के पर्चे ही बन सके। इसके बाद हड़तालियों ने ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर को बंद करा दिया। वहीं, ट्रॉमा सेंटर में पर्ची नहीं बनने से कई मरीज तीन से चार घंटे तक स्ट्रेचर पर ही पड़े रहे। दोपहर 12:15 बजे पहुंचे एडीएम सिटी ने शाम 6:30 बजे तक आरोपियों को पकड़ने का आश्वासन दिया तो डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त की दी। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर डॉक्टरों ने फिर हड़ताल शुरू कर दी।
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एसआरएन में हड़ताल के चलते ट्रॉमा सेंटर भी बंद हो गया है।
- फोटो : अमर उजाला।
जार्जटाउन थाने में दर्ज किया गया केस
जॉर्ज टाउन थाना पुलिस में कौशांबी के रहने वाले युवक के खिलाफ मारपीट की धाराओं में केस दर्ज किया है। एलआईसी रोड निवासी डॉ. अनुराग कुमार का आरोप है कि उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले कहा कि आपका पार्सल आया हुआ है। अपने आवास के बाहर आते ही 6 से 7 हमलावर थप्पड़ जड़कर फरार हो गए। पुलिस की एक टीम आरोपी को दबोचने के लिए कौशाम्बी रवाना हो गई है।
मरीजों को वार्ड में सन्नाटा, खाली पड़े बेड
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एसआरएन अस्पताल में खाली पड़े बेड।
- फोटो : अमर उजाला।
एसआरएन अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते ओपीडी बंद रही। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ट्रॉमा सेंटर बंद होने के कारण मरीजों की भर्ती नहीं हो सकी है। इससे अस्पताल में रोगियों के वार्ड में सन्नाटा रहा।
हमलावरों की गिरफ्तारी पर अड़े
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एसआरएन अस्पताल में धरने पर बैठे जूनियर डॉक्टर।
- फोटो : अमर उजाला।
एसआरएन अस्पताल के जूनियर डॉक्टर हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। कहा कि ऐसे असुरक्षित माहौल में वह काम नहीं कर पाएंगे। चाहे जहां कोई मारपीट कर चला जा रहा है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है।
ओपीडी बंद होने से परेशान हुए मरीज
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ओपीडी बंद होने से परेशान हुए मरीज।
- फोटो : अमर उजाला।
एसआरएन अस्पताल में बुधवार को ओपीडी बंद होने के कारण मरीज काफी परेशान हुए। जौनपुर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, भदोही आदि जनपदों से बड़ी संख्या में मरीज रोजाना अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचते हैं। बुधवार को पहुंचे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एडीएम सिटी के आश्वासन पर दोपहर एक बजे जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल को आंशिक रूप से स्थगित किया।