फिरोज पप्पू हत्याकांड: पूर्व सांसद रिजवान जहीर, बेटी जेबा और दामाद रमीज दोषमुक्त; MP-MLA कोर्ट ने सुनाया फैसला
फिरोज पप्पू हत्याकांड में एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, बेटी जेबा और दामाद रमीज को दोषमुक्त करार दिया। साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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यूपी के बलरामपुर में बहुचर्चित पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू हत्याकांड में शुक्रवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान और दामाद रमीज नेमत को दोषमुक्त करार दिया।
अपर सत्र न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) प्रदीप कुमार तृतीय ने उपलब्ध साक्ष्यों, अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष इन तीनों आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका। फैसले के साथ ही तीनों को बड़ी कानूनी राहत मिल गई।
धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी
बताते चलें कि चार जनवरी 2022 की रात तुलसीपुर-जरवा मार्ग पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी। हत्या के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान, दामाद रमीज नेमत सहित अन्य लोगों के नाम प्रकाश में आए। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मामले का विचारण एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा था।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के साथ प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष तीनों आरोपियों के विरुद्ध आरोपों को विधिक मानकों के अनुरूप सिद्ध नहीं कर सका। इसके आधार पर अदालत ने रिजवान जहीर, जेबा रिजवान और रमीज नेमत को दोषमुक्त करार दिया।
गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी सुनाया गया फैसला
शुक्रवार को पूर्व सांसद रिजवान जहीर से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी एमपी-एमएलए कोर्ट में फैसला सुनाया गया। यह मामला 21 जुलाई 2024 को तुलसीपुर थाने में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह की तहरीर पर दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर 30 जुलाई 2025 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई भी अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार तृतीय की अदालत में चल रही थी। अदालत ने इस प्रकरण में भी अपना निर्णय सुनाया।