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UP: कानपुर पर दोतरफा मार, एससीआर हाथ न आया, क्रीडा के गठन में भी सुस्ती, साझा विकास का सपना अधुरा, उठे ये सवाल

Fri, 17 Jul 2026 10:03 AM IST
Himanshu Awasthi पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 17 Jul 2026 10:03 AM IST
सार

Kanpur News: कानपुर और आसपास के सात जिलों के एकीकृत विकास के लिए प्रस्तावित 'क्रीडा' योजना फाइलों में सिमट कर रह गई है। एससीआर को प्राथमिकता मिलने के बाद क्रीडा की प्रक्रिया ठप पड़ी है, जिससे कानपुर का औद्योगिक और बुनियादी विकास अधर में लटका हुआ है।

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Kanpur hit by double blow SCR project fails to materialize and progress on sports authority formation stalls
कानपुर क्रीडा और एससीआर मामला - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रदेश की औद्योगिक राजधानी की पहचान रखने वाले कानपुर के विकास के लिए बहुप्रचारित एक योजना फाइलों में सिमट कर रह गई । इस योजना की घोषणा अप्रैल 2025 स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) से कानपुर नगर को बाहर करने के साथ ही की गई थी। नाम कानपुर रीजन इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट अथॉरिटी (क्रीडा) था।

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दावा था कि इससे कानपुर नगर और आसपास के सात जिलों को एकीकृत विकास के मॉडल से जोड़ा जाएगा। उद्योग, परिवहन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश को एकीकृत दृष्टि से विकसित करने की बात थी। कुछ बैठकें हुईं। बड़ी-बड़ी खबरें छपीं लेकिन फिर कुछ नहीं हुआ। नतीजा यह निकला कि कानपुर दोनों तरफ से मारा गया। एससीआर भी गया और क्रीडा का भी गठन नहीं हुआ।

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20,094 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का साझा विकास करना है
घोषणा के वक्त बताया गया था कि क्रीडा के तहत कानपुर नगर के साथ कानपुर देहात, फतेहपुर, कन्नौज, औरैया, बांदा, हमीरपुर और जालौन जिले तक 20,094 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का साझा विकास करना है। मास्टर प्लान-2051 के तहत पूरे क्षेत्र को एक इकाई मानकर बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विस्तार, परिवहन नेटवर्क और निवेश को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जानी थी।

आसपास के जिलों में विकास की गति धीमी
दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर प्रस्तावित इस मॉडल से आसपास के जिलों को विकास की मुख्यधारा में लाने की बात कही गई थी। अधिकारियों का तर्क था कि एससीआर से कानपुर नगर व कानपुर देहात को इसलिए हटाया गया था क्योंकि इनके शामिल होने से एससीआर का दायरा काफी बड़ा हो रहा था। कानपुर में उद्योगों के अलावा आईआईटी, डिफेंस कॉरिडोर, फ्रेट कॉरिडोर, मेट्रो और एयरपोर्ट जैसे अवस्थापना सुविधाएं हैं, लेकिन आसपास के जिलों में विकास की गति धीमी है।

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क्रीडा की प्रक्रिया ठप ही हो गई
क्रीडा का गठन कर यही असंतुलन दूर करना था। फिर भी शुरुआती चर्चाओं और बैठकों से आगे योजना बढ़ नहीं सकी। न अथॉरिटी का गठन हुआ न अधिकारों और वित्तीय ढांचे पर कोई ठोस फैसला। इस बीच प्रदेश सरकार ने लखनऊ और उसके आसपास के जिलों के लिए एससीआर को प्राथमिकता दे दी। इसके बाद क्रीडा की प्रक्रिया ठप ही हो गई।

पहले एससीआर की प्रक्रिया पूरी की जाए
कंसल्टेंसी के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आगे की कार्यवाही को शासन की मंजूरी ही नहीं मिली और कानपुर अभी भी अपने विकास की राह देख रहा है। केडीए सचिव अभय पांडेय ने बताया कि क्रीडा का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। फिलहाल निर्णय लिया गया है कि पहले एससीआर की प्रक्रिया पूरी की जाए। वैसे भी क्रीडा की कंसल्टेंसी के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन शासन की अनुमति मिलने तक इसे स्थगित रखा गया है।

क्यों जरूरी है क्रीडा का गठन
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि कानपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र का विकास केवल नगर सीमा तक सीमित नहीं रह सकता। आसपास के जिलों को एकीकृत योजना में शामिल किया जाए तो उद्योगों का विस्तार, रोजगार सृजन, बेहतर परिवहन और संतुलित शहरीकरण संभव होगा। शहर पर आबादी और यातायात का दबाव भी घटेगा। पड़ोसी जिलों की विकास क्षमता का भी उपयोग हो सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार कानपुर की औद्योगिक क्षमता और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सरकार को क्रीडा जैसी क्षेत्रीय विकास व्यवस्था पर फिर से गंभीरता से विचार करना होगा।

एससीआर की कार्ययोजना अंतिम चरण में है और अगले एक से डेढ़ महीने में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसके बाद क्रीडा से जुड़े कार्य शुरू किए जाएंगे। एससीआर के क्रियान्वयन से जो अनुभव मिलेगा वह क्रीडा के क्रियान्वयन में मदद करेगा।  -अवनीश कुमार अवस्थी, मुख्यमंत्री के सलाहकार

कानपुर के समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार कानपुर के लिए मेट्रो विस्तार, एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, रिंग रोड समेत कई बड़े प्रोजेक्ट बने हैं। इन योजनाओं का असर जल्द धरातल पर दिखाई देगा।  -सुरेंद्र मैथानी, भाजपा विधायक

क्रीडा की कवायद भी जल्द आगे बढ़ेगी शासन व प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कभी-कभी समय लगता है। क्रीडा की कवायद भी जल्द आगे बढ़ेगी और सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।  -सलिल विश्नोई, भाजपा एमएलसी

क्रीडा के तहत काम शुरू होना चाहिए था। इस विषय पर विकास प्राधिकरण और शासन स्तर पर बातचीत की जाएगी।  -नीलिमा कटियार, भाजपा विधायक

कानपुर को मजबूत राजनीतिक नेतृत्व नहीं मिल रहा है। सत्ताधारी दल के पास स्पष्ट विजन नहीं है। इसीलिए संभावनाओं के बावजूद कानपुर पिछड़ रहा है।  -अमिताभ बाजपेई, सपा विधायक

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