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Shamli News: सरकारी विद्यालयों में वर्तनी वाहिनी वाटिका से बदलेगी भाषा की तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 31 Jan 2026 01:13 AM IST
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प्राथमिक विद्यालय मखमलपुर नंबर दो में शुद्ध अशुद्ध शब्द को समझते बच्चे. स्कूल
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शामली। जिले के परिषदीय विद्यालयों में हिंदी वर्तनी की शुद्धता को लेकर अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। सभी स्कूलों में वर्तनी वाहिनी वाटिका की स्थापना की जा रही है। शुद्ध शब्द, सशक्त भविष्य नामक इस नवाचार का उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक के छात्र-छात्राओं में मानक हिंदी वर्तनी के प्रति समझ विकसित करना और शुद्ध लेखन की आदत डालना है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौड़ द्वारा प्रस्तावित यह नवाचार पारंपरिक रटंत प्रणाली से हटकर दृश्य-श्रव्य एवं गतिविधि आधारित 3-एस मॉडल (देखकर, बोलकर, लिखकर) पर आधारित है, जिससे बच्चे सहज रूप से सही वर्तनी सीख सकें।
अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में वर्तनी वाटिका विकसित की जा रही है, जहा प्रायः गलत लिखे जाने वाले हिंदी शब्दों को शुद्ध रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में एक वर्तनी कोना बनाया गया है, जहां प्रतिदिन पांच कठिन एवं महत्वपूर्ण शब्द लिखे जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय’ और हस्ताक्षर जैसे शब्दों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
प्रार्थना सभा के अंत में प्रतिदिन एक छात्र आज का शब्द उच्चारित करता है और सभी छात्र हथेली या हवा में उंगली से लिखकर उसका अभ्यास करते हैं। प्रत्येक कक्षा से दो छात्रों को वर्तनी सारथी नामित किया गया है, जो सहपाठियों की वर्तनी सुधार में शिक्षक का सहयोग करते हैं। बीएसए ने बताया कि शनिवार को नो-बैग डे के अवसर पर वर्तनी अंताक्षरी, शब्द-सीढ़ी जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक छात्र के लिए त्रुटि बैंक डायरी तैयार कराई गई है, जिसमें बार-बार होने वाली गलतियों को सही रूप में लिखवाया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौड़ का मानना है कि यह नवाचार छात्रों में भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ हिंदी लेखन की गुणवत्ता में स्थायी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बच्चों में हिंदी की समझ भी पैदा होगी।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौड़ द्वारा प्रस्तावित यह नवाचार पारंपरिक रटंत प्रणाली से हटकर दृश्य-श्रव्य एवं गतिविधि आधारित 3-एस मॉडल (देखकर, बोलकर, लिखकर) पर आधारित है, जिससे बच्चे सहज रूप से सही वर्तनी सीख सकें।
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अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में वर्तनी वाटिका विकसित की जा रही है, जहा प्रायः गलत लिखे जाने वाले हिंदी शब्दों को शुद्ध रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में एक वर्तनी कोना बनाया गया है, जहां प्रतिदिन पांच कठिन एवं महत्वपूर्ण शब्द लिखे जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय’ और हस्ताक्षर जैसे शब्दों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
प्रार्थना सभा के अंत में प्रतिदिन एक छात्र आज का शब्द उच्चारित करता है और सभी छात्र हथेली या हवा में उंगली से लिखकर उसका अभ्यास करते हैं। प्रत्येक कक्षा से दो छात्रों को वर्तनी सारथी नामित किया गया है, जो सहपाठियों की वर्तनी सुधार में शिक्षक का सहयोग करते हैं। बीएसए ने बताया कि शनिवार को नो-बैग डे के अवसर पर वर्तनी अंताक्षरी, शब्द-सीढ़ी जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक छात्र के लिए त्रुटि बैंक डायरी तैयार कराई गई है, जिसमें बार-बार होने वाली गलतियों को सही रूप में लिखवाया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौड़ का मानना है कि यह नवाचार छात्रों में भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ हिंदी लेखन की गुणवत्ता में स्थायी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बच्चों में हिंदी की समझ भी पैदा होगी।

प्राथमिक विद्यालय मखमलपुर नंबर दो में शुद्ध अशुद्ध शब्द को समझते बच्चे. स्कूल
