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Unnao News: मॉडल स्टडी से तय होगा कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग का भविष्य
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फोटो-1-गंगा में आई बाढ़ से कटा कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग। संवाद
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उन्नाव। गंगा की बाढ़ से क्षतिग्रस्त कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग का अस्तित्व खतरे में है। मार्ग को कटान से बचाने के लिए आईआईटी रुड़की ने पीडब्ल्यूडी को मॉडल स्टडी कराने का सुझाव दिया है। इसमें आईआईटी के इंजीनियर मशीनों से सर्वे करेंगे और स्टडी के जरिए मार्ग को कटान से बचाने के उपाय बताएंगे। इस पर करीब 40 लाख रुपये खर्च आएगा। पीडब्ल्यूडी ने इसके लिए शासन को पत्र भेजकर बजट की मांग की है।
उन्नाव-हरदोई रोड को कालीमिट्टी से फतेहपुर चौरासी होते हुए कानपुर के शिवराजपुर से जोड़ने वाले 14.60 किलोमीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण 16 जून 2025 को पूरा हुआ था। इसके बाद इसे आवागमन के लिए खोला गया था। अगस्त में गंगा में आई बाढ़ और फिर 600 मीटर तक कटान होने से करीब दो किलोमीटर मार्ग का हिस्सा पानी में बह गया था। इसके बाद वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था। पीडब्ल्यूडी निर्माणखंड ने यहां पर ईंट भरी बोरियां लगाकर कटान रोकने का प्रयास किया था लेकिन यह नाकाफी साबित हुआ था। बोरियां पानी में बह गई थीं। कटान से मार्ग को बचाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने आईआईटी रुड़की की मदद ली थी। रुड़की से आए इंजीनियर ने निरीक्षण किया था। इंजीनियर ने जो रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को दी उसमें मशीनों के जरिए मॉडल स्टडी कराने का सुझाव दिया। रिपोर्ट में बताया है कि मार्ग को कटान से बचाने के लिए स्थायी उपाय किए जाने की जरूरी हैं।
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एकल निरीक्षण में खर्च हो चुके हैं दो लाख, मॉडल स्टडी पर होंगे 40 लाख
कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग का चौड़ीकरण व नवनिर्माण 27 करोड़ से हुआ है। मार्ग बने एक साल भी नहीं हुआ है और कटान से रोड खत्म होने की कगार पर है। पीडब्ल्यूडी सूत्रों के मुताबिक पूर्व में आईआईटी के एक इंजीनियर के निरीक्षण पर करीब दो लाख खर्च हो चुके हैं। अब मॉडल स्टडी पर 40 लाख खर्च होने का अनुमान है। यह खर्च केवल निरीक्षण का होगा। इसके बाद आईआईटी की ओर से स्थायी कार्यों को लेकर जो सुझाव दिए जाएंगे उसका पर खर्च अलग से होगा। जानकारों की माने तो मॉडल स्टडी से लेकर स्थायी समाधान तक में फिर से करोड़ों खर्च होने का अनुमान है।
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कटान के कारण
गंगा की धारा में रेत के टीले बन गए हैं। इससे फतेहपुर चौरासी के गांव बद्रीपुरवा के पास से गंगा की धारा दो भागों में बंटकर उपधारा में तब्दील हो गई है। इससे एक तरफ जहां शिवराजपुर मार्ग कटान की चपेट में आ चुका है वहीं दूसरी ओर गांव सुब्बापुरवा, चिरंजूपुरवा में किसानों की जमीन भी गंगा में समा गई है। जाजामऊ एहतमाली के गांव नयाबंगला के पास बना शिव मंदिर कटान से बह गया है।
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आमने-सामने
आईआईटी रुड़की से मॉडल स्टडी कराने के लिए शासन को पत्र भेजकर बजट की मांग की गई है। बजट मिलने पर आगे की कार्रवाई कराई जाएगी। वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है। गंगा की बदली धारा को सही कराने के लिए सिंचाई विभाग ड्रेजिंग कार्य करा दे तो कुछ राहत मिल सकती है।-सुबोध कुमार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी निर्माणखंड।
गंगा में बिजली ट्रांसमिशन के दो टावर लगे हैं। उसी जगह रेती के टीले बन जाते हैं। ड्रेजिंग मशीन से टुकड़ों में सफाई कराई जा सकती है लेकिन इसके लिए एनजीटी व शासन से अनुमति लेनी पड़ेगी। यह प्रक्रिया बहुत लंबी है। पीडब्ल्यूडी अपना स्ट्रक्चर मजबूत कर ले। -दीपक यादव, एक्सईएन सिंचाई विभाग।
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उन्नाव-हरदोई रोड को कालीमिट्टी से फतेहपुर चौरासी होते हुए कानपुर के शिवराजपुर से जोड़ने वाले 14.60 किलोमीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण 16 जून 2025 को पूरा हुआ था। इसके बाद इसे आवागमन के लिए खोला गया था। अगस्त में गंगा में आई बाढ़ और फिर 600 मीटर तक कटान होने से करीब दो किलोमीटर मार्ग का हिस्सा पानी में बह गया था। इसके बाद वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था। पीडब्ल्यूडी निर्माणखंड ने यहां पर ईंट भरी बोरियां लगाकर कटान रोकने का प्रयास किया था लेकिन यह नाकाफी साबित हुआ था। बोरियां पानी में बह गई थीं। कटान से मार्ग को बचाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने आईआईटी रुड़की की मदद ली थी। रुड़की से आए इंजीनियर ने निरीक्षण किया था। इंजीनियर ने जो रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को दी उसमें मशीनों के जरिए मॉडल स्टडी कराने का सुझाव दिया। रिपोर्ट में बताया है कि मार्ग को कटान से बचाने के लिए स्थायी उपाय किए जाने की जरूरी हैं।
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एकल निरीक्षण में खर्च हो चुके हैं दो लाख, मॉडल स्टडी पर होंगे 40 लाख
कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग का चौड़ीकरण व नवनिर्माण 27 करोड़ से हुआ है। मार्ग बने एक साल भी नहीं हुआ है और कटान से रोड खत्म होने की कगार पर है। पीडब्ल्यूडी सूत्रों के मुताबिक पूर्व में आईआईटी के एक इंजीनियर के निरीक्षण पर करीब दो लाख खर्च हो चुके हैं। अब मॉडल स्टडी पर 40 लाख खर्च होने का अनुमान है। यह खर्च केवल निरीक्षण का होगा। इसके बाद आईआईटी की ओर से स्थायी कार्यों को लेकर जो सुझाव दिए जाएंगे उसका पर खर्च अलग से होगा। जानकारों की माने तो मॉडल स्टडी से लेकर स्थायी समाधान तक में फिर से करोड़ों खर्च होने का अनुमान है।
कटान के कारण
गंगा की धारा में रेत के टीले बन गए हैं। इससे फतेहपुर चौरासी के गांव बद्रीपुरवा के पास से गंगा की धारा दो भागों में बंटकर उपधारा में तब्दील हो गई है। इससे एक तरफ जहां शिवराजपुर मार्ग कटान की चपेट में आ चुका है वहीं दूसरी ओर गांव सुब्बापुरवा, चिरंजूपुरवा में किसानों की जमीन भी गंगा में समा गई है। जाजामऊ एहतमाली के गांव नयाबंगला के पास बना शिव मंदिर कटान से बह गया है।
आमने-सामने
आईआईटी रुड़की से मॉडल स्टडी कराने के लिए शासन को पत्र भेजकर बजट की मांग की गई है। बजट मिलने पर आगे की कार्रवाई कराई जाएगी। वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है। गंगा की बदली धारा को सही कराने के लिए सिंचाई विभाग ड्रेजिंग कार्य करा दे तो कुछ राहत मिल सकती है।-सुबोध कुमार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी निर्माणखंड।
गंगा में बिजली ट्रांसमिशन के दो टावर लगे हैं। उसी जगह रेती के टीले बन जाते हैं। ड्रेजिंग मशीन से टुकड़ों में सफाई कराई जा सकती है लेकिन इसके लिए एनजीटी व शासन से अनुमति लेनी पड़ेगी। यह प्रक्रिया बहुत लंबी है। पीडब्ल्यूडी अपना स्ट्रक्चर मजबूत कर ले। -दीपक यादव, एक्सईएन सिंचाई विभाग।

फोटो-1-गंगा में आई बाढ़ से कटा कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग। संवाद
