एयरपोर्ट पर गोली चलने का मामला: गृह मंत्रालय ने तलब की रिपोर्ट, खुद ही पिस्टल की जांच कर रहे थे शिवसेना नेता
एयरपोर्ट पर गोली चलने के मामले में गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की है। केंद्रीय एजेंसियों की जांच में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आई है। जांच में पता चला कि शिवसेना नेता खुद ही पिस्टल की जांच कर रहे थे। मामले में जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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Varanasi Airport: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लाइसेंसी पिस्टल से गोली चलने की रिपोर्ट गृह मंत्रालय से तलब की गई है। केंद्रीय एजेंसियों ने भी मामले की जांच शुरू कर दी। एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट आएगी। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा की गंभीर चूक सामने आई है। अब जिम्मेदारी तय की जा रही है।
एयरपोर्ट पर गोली चलने से रविवार को महिला सुरक्षाकर्मी सहित दो लोग घायल हो गए थे। इसकी जांच सोमवार से शुरू हो गई। डीजीसीए और केंद्रीय एजेंसियों की जांच से पता चला कि शिवसेना नेता कमलेश राय ने सुरक्षाकर्मियों को पिस्टल नहीं दी थी। खुद ही उसे दिखाने का प्रयास करने लगे और गलत हैंडलिंग गोली चल गई। अब घटना की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं ताकि गंभीर चूक की जिम्मेदारी तय की जा सके।
एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता ने बताया कि जांच एजेंसियों ने पूरे दिन एयरलाइन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और मामले से जुड़े अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों से अलग-अलग जानकारी ली है। पूछा है कि यात्री के पास लाइसेंसी हथियार था तो प्रारंभिक जांच से गुजरकर एयरपोर्ट के अंदर कैसे पहुंच गया।
पिस्टल हैंडलिंग के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार, सुरक्षाकर्मी ही पिस्टल की जांच करते हैं लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। आरोपी ही पिस्टल की जांच करता मिला है। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी कई बार नेताओं के प्रभाव में आ जाते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है।
जांच की दो तरह की व्यवस्था : एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था दो हिस्सों में बंटी रहती है। इसमें एंटी हाईजैकिंग और एंटी सबोटेज शामिल है।
एंटी हाईजैकिंग : सुरक्षा व्यवस्था में सीआईएसएफ की भूमिका होती है। विमान में किसी व्यक्ति के प्रतिबंधित वस्तु ले जाने या विमान की सुरक्षा से जुड़े मामलों में सीआईएसएफ की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है।
एंटी सबोटेज : तोड़फोड़, बम या विस्फोटक से जुड़े खतरों की रोकथाम में एयरपोर्ट अथारिटी और एयरलाइन ऑपरेटर की भूमिका भी रहती है। संदिग्ध गतिविधि पर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत अतिरिक्त जांच की जा सकती है। 10 प्रतिशत रैंडम जांच का अधिकार सीआईएसएफ के पास होता है।
बीसीएएस के हाथों में एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था
एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) के हाथों में है। सुरक्षा मानकों के उल्लंघन या किसी एजेंसी की लापरवाही सामने आने पर बीसीएएस के स्तर से दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। असिस्टेंट डायरेक्टर रविंद्र सिंह यादव सहित अन्य अधिकारी भी तैनात हैं। केंद्रीय एजेंसियों की जांच में अगर किसी स्तर पर निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन सामने आता है तो बीसीएएस के अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।
छोटे हथियार की हैंडलिंग संवेदनशील फिर भी लापरवाही
सूत्रों के मुताबिक, कमलेश राय के पास लाइसेंसी पिस्टल थी, लेकिन एयरपोर्ट परिसर में उसे संभालने के दौरान सावधानी नहीं बरती गई। छोटे हथियार की हैंडलिंग संवेदनशील होती है। हथियार की दिशा में मामूली बदलाव भी गंभीर परिणाम दे सकता है इसलिए हथियार को हमेशा सुरक्षित दिशा में रखना और ट्रिगर अनुशासन का पालन करना जरूरी है। प्रशिक्षण के बावजूद हथियार की हैंडलिंग में चूक हुई।
हवाई यात्रा में लाइसेंसी हथियार ले जाने के ये हैं नियम
- लाइसेंसी हथियार को हैंड बैगेज में लेकर विमान के केबिन में जाने की अनुमति नहीं होती है। इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत चेक-इन बैगेज में ही जमा कराया जाता है।
- टिकट बुक करने के साथ ही यात्री को शस्त्र ले जाने की जानकारी संबंधित एयरलाइन को देनी होती है। यह प्रक्रिया पूरी की गई थी।
- शस्त्र लाइसेंस समेत आवश्यक दस्तावेज और उससे जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होती है। निर्धारित शुल्क भी जमा करना पड़ता है।
- यात्रा के दिन चेक-इन काउंटर पर पहुंचने के बाद यात्री को स्टाफ को स्पष्ट रूप से बताना होता है कि उसके पास लाइसेंसी शस्त्र और गोलियां हैं।
- निर्धारित प्रक्रिया के तहत शस्त्र, कारतूस, लाइसेंस, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज की जांच की जाती है।
- नियमों के अनुसार शस्त्र अनलोड यानी उसमें गोलियां नहीं होनी चाहिए। कारतूस को भी पैकेजिंग और प्रक्रिया के तहत ले जाना होता है।
- जांच के बाद ही एयरलाइन शस्त्र को निर्धारित तरीके से सुरक्षित रूप से स्वीकार किया जाता है।