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मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: वाराणसी को दी बड़ी सौगात, दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मिली मंजूरी
Wed, 15 Jul 2026 10:12 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Wed, 15 Jul 2026 10:12 PM IST
सार
पीएम मोदी की कैबिनेट में गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी
मिली। इनमें पहली परियोजना वाराणसी रिंग रोड तक 46 किमी लंबा छह लेन का ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर और दूसरी परियोजना वरुणा नदी के किनारे 43 किमी लंबा छह/चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर है।
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काशी विश्वनाथ मंदिर से बनने वाले एफओबी का मॉडल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने वाराणसी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए बुधवार को दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। करीब 25,445 करोड़ रुपये की लागत से कुल 89 किमी लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
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यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर विकसित की जाएगी, यानी इसे सरकार और निजी कंपनी मिलकर बनाएंगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की तरफ से विकसित किए जाने वाले इस कॉरिडोर में मुख्य एलिवेटेड मार्ग के साथ फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड भी शामिल होंगे।
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पहली परियोजना के तहत एनएच-19 से वाराणसी रिंग रोड तक 46 किमी लंबा छह लेन का ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस परियोजना पर 14,447 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके पूरा होने के बाद एनएच-19 और रिंग रोड के बीच सफर आसान होगा। साथ ही शहर के भीतरी हिस्सों में वाहनों का दबाव कम होगा।
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दूसरी परियोजना के तहत वरुणा नदी के किनारे 43 किमी लंबा छह/चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना 10,998 करोड़ रुपये की लागत से हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (सरकारी-निजी) से बनाई जाएगी। यह कॉरिडोर एनएच-31 को काशी रेलवे स्टेशन से सीधे जोड़ेगा और वाराणसी डी-कंजेशन योजना का प्रमुख हिस्सा होगा।
आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी दोनों परियोजनाएं : कमिश्नर
वाराणसी मंडल के कमिश्रर एस राजलिंगम के मुताबिक दोनों परियोजनाएं आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। परियोजनाओं से वाराणसी की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई मजबूती मिलेगी। वरुणा नदी कॉरिडोर के माध्यम से चंदौली सोशल इकोनॉमिक क्षेत्र, सामाजिक गतिविधि केंद्रों और छह प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्र तक पहुंच बेहतर होगी। वहीं, एनएच-19 से रिंग रोड कॉरिडोर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आने-जाने वाले वाहनों के लिए तेज और सुगम विकल्प उपलब्ध कराएगा। दोनों परियोजनाएं वाराणसी को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के साथ-साथ आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में तैयार करेगा। शहर में जाम की समस्या कम होगी। ईंधन और समय की बचत होगी और व्यापार, पर्यटन और निवेश गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
वाराणसी मंडल के कमिश्रर एस राजलिंगम के मुताबिक दोनों परियोजनाएं आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। परियोजनाओं से वाराणसी की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई मजबूती मिलेगी। वरुणा नदी कॉरिडोर के माध्यम से चंदौली सोशल इकोनॉमिक क्षेत्र, सामाजिक गतिविधि केंद्रों और छह प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्र तक पहुंच बेहतर होगी। वहीं, एनएच-19 से रिंग रोड कॉरिडोर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आने-जाने वाले वाहनों के लिए तेज और सुगम विकल्प उपलब्ध कराएगा। दोनों परियोजनाएं वाराणसी को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के साथ-साथ आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में तैयार करेगा। शहर में जाम की समस्या कम होगी। ईंधन और समय की बचत होगी और व्यापार, पर्यटन और निवेश गतिविधियों को भी गति मिलेगी।