UP: गंगा-वरुणा देश का सबसे लंबा, सबसे ज्यादा बजट वाला एलिवेटेड रोड होगा; 60 मिनट का सफर 20 मिनट में होगा पूरा
केंद्र सरकार ने वाराणसी के लिए 25,445 करोड़ रुपये की दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें 14,447 करोड़ रुपये से 46 किमी लंबा गंगा-ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर और 10,998 करोड़ रुपये से वरुणा नदी किनारे 43 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। गंगा द्वार से मंदिर गंगा तक 910 मीटर का केबल-स्टेड ब्रिज भी बनेगा। इन परियोजनाओं से 60 मिनट का सफर घटकर 20 मिनट रह जाएगा और वाहनों की रफ्तार 80 से 100 किमी प्रति घंटा होगी।
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Elevated Road in Varanasi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने वाराणसी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए बुधवार को दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। करीब 25,445 करोड़ रुपये की लागत से कुल 89 किमी लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर विकसित की जाएगी, यानी इसे सरकार और निजी कंपनी मिलकर बनाएंगे। अनुमान है कि कॉरिडोर बनने के बाद 60 मिनट की दूरी 20 मिनट में पूरी हो जाएगी। ये काशी की अब तक की सबसे महंगी परियोजनाएं हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की तरफ से विकसित किए जाने वाले इस कॉरिडोर में मुख्य एलिवेटेड मार्ग के साथ फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड भी शामिल होंगे। पहली परियोजना के तहत एनएच-19 से वाराणसी रिंग रोड तक 46 किमी लंबा छह लेन का ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस परियोजना पर 14,447 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके पूरा होने के बाद एनएच-19 और रिंग रोड के बीच सफर आसान होगा। साथ ही शहर के भीतरी हिस्सों में वाहनों का दबाव कम होगा।
दूसरी परियोजना के तहत वरुणा नदी के किनारे 43 किमी लंबा छह/चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना 10,998 करोड़ रुपये की लागत से हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (सरकारी-निजी) से बनाई जाएगी। यह कॉरिडोर एनएच-31 को काशी रेलवे स्टेशन से सीधे जोड़ेगा और वाराणसी डी-कंजेशन योजना का प्रमुख हिस्सा होगा।
हर साल आते हैं 15 करोड़ पर्यटक, बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, हर साल 15 करोड़ से ज्यादा पर्यटक और श्रद्धालु वाराणसी आते हैं। प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर योजना के अनुरूप यह कॉरिडोर मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इसके जरिये प्रमुख राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों, लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट और रामनगर आईडब्ल्यूएआई पोर्ट तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
यह परियोजना काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के घाटों जैसे प्रमुख स्थलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर करेगी। यह कॉरिडोर वाराणसी और चंदौली के सड़क नेटवर्क पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिये एनएच-19, वाराणसी रिंग रोड (एनएच-135 बी), रामनगर, बीएचयू और शहर के प्रमुख इलाकों के बीच तेज और नियंत्रित पहुंच मिलेगी।
गंगा द्वार से बनेगा 910 मीटर फुट ओवरब्रिज
इन्हीं परियोजनाओं के तहत गंगा नदी पर 910 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज बनेगा। इससे काशी विश्वनाथ मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। इस पर पैदल यात्री ट्रैवलेटर (ऑटोमैटिक चलने वाला रास्ता), आपातकालीन पार्किंग, ध्वनि अवरोधक, विशेष लाइटिंग और शिव-काशी से जुड़ी डिजाइन होगी।
पीएम का ट्वीट
उप्र में कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन को और अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनाने के लिए हम कृतसंकल्प हैं। इसी दिशा में आज हमारी सरकार ने वरुणा नदी के किनारे 6 या 4 लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ हमारे सांस्कृतिक महत्व के शहरों के लिए मॉडल बनेगा, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से यहां के लोगों का जीवन भी और आसान होगा।
इसी कड़ी में आज हमने गंगा के किनारे 6 लेन के अत्याधुनिक कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी है। इससे शहर के प्रमुख धार्मिक शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों पर पहुंच और बेहतर होगी। साथ ही रोड़ नेटवर्क पर यातायात का दबाव कम होने से आवागम ज्यादा सुगम होगा। यह प्रोजेक्ट पूर्वांचल के आर्थिक विकास में और तेजी लाने वाला है।
आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी दोनों परियोजनाएं : कमिश्नर
वाराणसी मंडल के कमिश्रर एस राजलिंगम के मुताबिक दोनों परियोजनाएं आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। परियोजनाओं से वाराणसी की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई मजबूती मिलेगी। वरुणा नदी कॉरिडोर के माध्यम से चंदौली सोशल इकोनॉमिक क्षेत्र, सामाजिक गतिविधि केंद्रों और छह प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्र तक पहुंच बेहतर होगी।
वहीं, एनएच-19 से रिंग रोड कॉरिडोर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आने-जाने वाले वाहनों के लिए तेज और सुगम विकल्प उपलब्ध कराएगा। दोनों परियोजनाएं वाराणसी को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के साथ-साथ आधुनिक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में तैयार करेगा। शहर में जाम की समस्या कम होगी। ईंधन और समय की बचत होगी और व्यापार, पर्यटन और निवेश गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
एक नजर में गंगा-वरुणा परियोजना
- वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर : एक नजर में
- लंबाई : 43.218 किमी
- मार्ग : वरुणा नदी के किनारे एनएच-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक
- लेन : 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर
- लागत : 10,998.32 करोड़ रुपये
- मुख्य उद्देश्य : वाराणसी डी-कंजेशन प्लान को गति देना
- यात्रा समय : 40 मिनट से घटकर 20 मिनट
- विशेषता : एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच निर्बाध संपर्क
- अतिरिक्त लाभ : चंदौली सामाजिक-आर्थिक (सोशियो-इकोनॉमिक) जोन, सोशल नोड और छह लॉजिस्टिक्स हब तक बेहतर पहुंच
एनएच-19–रिंग रोड एलिवेटेड कॉरिडोर : एक नजर में
- लंबाई : 46.039 किमी
- मार्ग : एनएच-19 से वाराणसी रिंग रोड तक
- लेन : 6 लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर
- लागत : 14,447.64 करोड़ रुपये
- मुख्य उद्देश्य : शहर में जाम कम करना और शहरी यातायात को सुगम बनाना
- यात्रा समय : 60 मिनट से घटकर 20 मिनट
- विशेषता : एनएच-19 और रिंग रोड के बीच सीधा और तेज संपर्क
- अतिरिक्त लाभ : धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक आसान पहुंच
दोनों परियोजनाओं से होंगे ये प्रमुख लाभ
- ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी।
- शहर के भीतर यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा।
- राष्ट्रीय राजमार्गों, रिंग रोड और रेलवे स्टेशन के बीच तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।
- धार्मिक पर्यटन, विशेषकर काशी विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
- व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
- पूर्वांचल और आसपास के जिलों की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
- ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
- आपातकालीन सेवाओं (एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि) की आवाजाही तेज होगी।