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Darbhanga: Pandits jam road for not getting dakshina in 25 crore yagna; Mahant Baua Sarkar accuses of fraud
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Bihar: 25 करोड़ के यज्ञ में पंडितों का हंगामा, दक्षिणा न मिलने पर जाम की सड़क; महंत बौआ सरकार पर ठगी का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Mon, 17 Mar 2025 05:00 PM IST
दरभंगा के लगमा स्थित जगदीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम में आयोजित लक्ष चंडी एवं अति महाविष्णु महायज्ञ के समापन के बाद शुक्रवार की रात एक बड़ा बवाल खड़ा हो गया। यज्ञ में शामिल हुए देशभर के 2100 पंडितों ने दक्षिणा नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए आश्रम परिसर में जमकर हंगामा किया। नाराज पंडितों ने दरभंगा-मनीगाछी मुख्य सड़क को जाम कर दिया और आश्रम के महंत बौआ सरकार के निवास स्थान को घेरकर जोरदार नारेबाजी की।
यह विवाद यज्ञ के समापन के कुछ ही घंटों बाद शुरू हुआ, जब रात करीब दो बजे पंडितों ने दक्षिणा न मिलने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई पंडितों का कहना है कि आयोजन समिति और महंत बौआ सरकार ने उन्हें ठगा है, जबकि महंत का कहना है कि सभी पंडितों को दक्षिणा दी जा चुकी है और इस मामले की जांच की जा रही है।
बिहार का सबसे बड़ा यज्ञ, 25 करोड़ रुपए के खर्च का दावा
गौरतलब है कि इस यज्ञ को बिहार का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बताया गया था, जिसमें करीब 25 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया था। इस भव्य आयोजन में 11 मंजिला हवन कुंड बनाया गया था। देशभर से इंटरव्यू के माध्यम से चुने गए 2100 पंडितों ने एक मार्च से 16 मार्च तक यज्ञ में भाग लिया।
पंडितों का दावा है कि यज्ञ में सहभागिता के लिए आयोजन समिति से उनका विधिवत कागजी अनुबंध हुआ था, जिसमें प्रत्येक पंडित को न्यूनतम ₹15,000 मानदेय देने की बात लिखी गई थी। इसके अलावा यज्ञ के दौरान आचार-संहिता और नियमों को लेकर भी शर्तें तय की गई थीं।
सड़क से लेकर यज्ञ स्थल तक बवाल
हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पंडित सड़क पर दौड़ते, नारेबाजी करते और हवन स्थल के बाहर प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। पंडितों ने यज्ञ स्थल से निकलकर मुख्य सड़क पर जाम लगाया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से आए पंडित अमित मिश्रा ने बेनीपुर अनुमंडल पदाधिकारी को फोन कर आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि आश्रम के महंत और उनके सहयोगी बिना भुगतान किए गायब हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम आयोजन समिति की ओर से स्थिति स्पष्ट तो की जाए, ताकि पंडित यह जान सकें कि उन्हें पैसे मिलेंगे या नहीं।
‘सभी को दक्षिणा दी गई, प्रशासन के साथ कर रहे जांच’
इस पूरे विवाद पर महंत बौआ सरकार का कहना है कि यज्ञ में आए सभी पंडितों को दक्षिणा दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि वे खुद सुबह से वीडियो फुटेज की समीक्षा कर रहे हैं। अगर किसी पंडित को वाकई भुगतान नहीं हुआ है, तो उसकी भी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने यज्ञ आयोजन जिला प्रशासन के सहयोग से किया है। अब प्रशासन के साथ बातचीत के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
स्थानीय प्रशासन की चुप्पी, स्थिति पर नजर
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन पंडितों के बढ़ते असंतोष को देखते हुए अब प्रशासन को सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। यह पूरा मामला धार्मिक आयोजनों की पारदर्शिता और व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। जब आयोजन इतने बड़े स्तर पर होते हैं, तो उनकी वित्तीय पारदर्शिता और सहभागियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना आयोजकों की जिम्मेदारी होती है।
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