होली के मौके पर बाढ़ अनुमंडल के औंटा गांव में सीआरपीएफ जवानों और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया गया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने औंटा निवासी एक युवक को बीती रात हिरासत में लिया है। इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार को सीआरपीएफ के डीआईजी रविंद्र भगत और बाढ़ के एसडीपीओ-1 आनंद कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और दोनों पक्षों के बीच लिखित माफीनामा के आधार पर सुलह करा दी।
इस दौरान डीआईजी रविंद्र भगत ने कहा कि गंगा किनारे असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है, जहां शराब और गांजा जैसे नशे का सेवन किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं से चेन छीनने की घटनाओं की भी शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि, इतने बड़े अधिकारी के इस बयान के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं कि यदि क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियां चल रही थीं तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि होली से एक दिन पहले सीआरपीएफ के एक जवान के साथ मारपीट की घटना हुई थी, जिसकी जानकारी पुलिस को थी। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद सीआरपीएफ के जवान गांव में पहुंचे और तोड़फोड़ व मारपीट की घटना सामने आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है, वह क्षेत्र नो-मैन्स लैंड जैसा है और वहां दुकानों का अतिक्रमण भी है, जिस पर प्रशासन का ध्यान नहीं जाता।
घटना में घायल पांचवीं कक्षा की छात्रा निकिता कुमारी ने बताया कि वह अपनी मां के साथ सीआरपीएफ कैंप के गेट पर गई थी, जहां एक जवान ने लाठी से मार दिया, जिससे उसके सिर में चोट लग गई। वहीं, पीड़ित दिलीप कुमार ने बताया कि वह सड़क किनारे खड़े थे। इसी दौरान उन्होंने करीब सौ से अधिक सीआरपीएफ जवानों को आते देखा। वह किनारे हटकर खड़े हो गए, लेकिन इसके बावजूद जवानों ने उन्हें लाठी से पीट दिया।
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इस मामले में एसडीपीओ-1 आनंद कुमार सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है। वहीं, डीआईजी रविंद्र भगत ने कहा कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां रहती हैं और संभव है कि जवानों ने उसी आधार पर किसी को टोका हो, जिसके बाद विवाद की स्थिति बन गई।
फिलहाल प्रशासन ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराकर स्थिति को सामान्य कर दिया है।