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Industry Department GM Arrested for Taking ₹50,000 Bribe in Araria
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Bihar News: रिश्वत के 50 हजार ने खोली कमीशन की पोल, उद्योग विभाग के GM गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अररिया Published by: पूर्णिया ब्यूरो Updated Sat, 08 Aug 2026 08:02 PM IST
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भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग, पटना की टीम ने अररिया में बड़ी कार्रवाई करते हुए उद्योग विभाग के महाप्रबंधक अनिल कुमार मंडल को कथित तौर पर 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। निगरानी विभाग के डीएसपी के अनुसार, कार्रवाई महाप्रबंधक के किराए के मकान में की गई, जहां से रिश्वत की रकम के रूप में 50 हजार रुपये बरामद किए गए। आरोप है कि मशीनों की आपूर्ति से जुड़ी राशि के भुगतान के एवज में महाप्रबंधक द्वारा कमीशन की मांग की जा रही थी।
मशीन सप्लायर की शिकायत पर निगरानी ने रचा जाल
निगरानी विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई मशीन सप्लायर कमरे आलम की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि विभिन्न उद्योग संचालकों को करीब 17 लाख रुपये मूल्य की मशीनों की आपूर्ति की गई थी। आरोप है कि इस राशि पर महाप्रबंधक द्वारा 5 प्रतिशत कमीशन के हिसाब से 85 हजार रुपये की मांग की जा रही थी।
शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर कमीशन देने का विरोध किया और इसकी जानकारी निगरानी विभाग, पटना को दी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई।
किराए के मकान में धावा, 50 हजार रुपये बरामद
सत्यापन के बाद गठित धावा दल ने महाप्रबंधक के किराए के मकान में कार्रवाई की। इस दौरान टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की और अनिल कुमार मंडल को हिरासत में ले लिया।
निगरानी विभाग के डीएसपी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। टीम ने मामले से जुड़े साक्ष्यों को भी संकलित किया। गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम आरोपी महाप्रबंधक को अपने साथ ले गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में मामला
निगरानी विभाग की कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत की गई है। इस धारा के तहत किसी लोक सेवक द्वारा अपने पद से जुड़े कार्य के बदले अनुचित लाभ या रिश्वत मांगना, स्वीकार करना अथवा प्राप्त करने का प्रयास करना अपराध है। दोष सिद्ध होने पर कानून के तहत तीन से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद उद्योग विभाग के कार्यालय में हड़कंप मच गया। मामले में आगे की जांच जारी है। हालांकि, महाप्रबंधक पर लगाए गए रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
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