अंबिकापुर शहर के बस स्टैंड के पास स्थित रिंगबांध तालाब पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रशासन और नगर निगम ने शनिवार को संयुक्त अभियान चलाया। जेसीबी मशीनों के जरिए तालाब में डाली गई मिट्टी को हटाने का कार्य शुरू किया गया, जिसे पहले प्रशासन द्वारा रोक दिया गया था।
कार्रवाई के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब खुद को कथित भू-स्वामी बताने वाले भू माफिया मौके पर पहुंच गए और कर्मचारियों के साथ विवाद करते हुए काम रुकवा दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने वहां मौजूद मशीनों और वाहनों को भी हटवा दिया। सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल पुलिस बल भेजा, लेकिन तब तक संबंधित लोग वहां से जा चुके थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इसके बाद प्रशासन ने पुनः कार्रवाई शुरू कर दी।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार रिंगबांध तालाब का कुल क्षेत्रफल 6.25 एकड़ निस्तार भूमि के रूप में दर्ज है। आरोप है कि तालाब के एक बड़े हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। इनमें से 57 डिसमिल भूमि की रजिस्ट्री जनवरी 2026 में आजाद इराकी के नाम पर कराई गई, जिसके बाद तालाब को पाटने का कार्य शुरू हुआ।
मामला सामने आने के बाद कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद अंबिकापुर तहसीलदार ने तत्काल प्रभाव से भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण और भराव कार्य पर रोक लगा दी थी। यह मुद्दा नगर निगम की सामान्य सभा में भी प्रमुखता से उठाया गया था।
निगम आयुक्त डीएन कश्यप के निर्देश पर अब अवैध भराव हटाने की कार्रवाई जारी है। प्रशासन द्वारा तालाब का सीमांकन भी कराया जाएगा। सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने जिले के सभी तालाबों का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं।
इस पूरे मामले में दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप भी सामने आए हैं। समाजसेवी कैलाश मिश्रा के अनुसार, भूमि के मूल स्वामी के नाम पर दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार किए गए, जिनमें वारिसों की जानकारी भी भिन्न है। इसी आधार पर रजिस्ट्री कराए जाने का आरोप लगाया गया है। मामला फिलहाल तहसील न्यायालय में लंबित है। शिकायतकर्ता पार्षद आलोक दुबे का कहना है कि संबंधित भूमि जलक्षेत्र है, जिसकी पुष्टि पटवारी की रिपोर्ट में भी की गई है। रिपोर्ट में स्थल पर पानी भरे होने का उल्लेख है, इसके बावजूद वहां भराव किया गया। रिंगबांध तालाब नगर निगम के प्रमुख 17 तालाबों में शामिल है।उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी जलभराव क्षेत्रों और तालाबों की प्रकृति में बदलाव पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इधर भूमाफिया के द्वारा गाली गलौज करने के बाद नगर निगम और प्रशासन की टीम उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में लगे हुए थे।