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ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार ग्राहकों को अब मिलेगा मुआवजा
Video Published by: Pankhudi Srivastava Updated Sat, 07 Mar 2026 02:59 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए ड्राफ्ट नियमों के तहत साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिलेगा, 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले इन नियमों की पूरी जानकारी के लिए वीडियो एंड तक जरूर देखें.
ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होने वाले बैंक ग्राहकों को राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मसौदा जारी किया। इसके तहत अब 50,000 रुपये तक के साइबर फ्रॉड होने पर ग्राहकों को मुआवजा मिल सकेगा। यदि धोखाधड़ी में नुकसान 50,000 रुपये तक होता है, तो ग्राहक को 85 फीसदी तक मुआवजा मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 25,000 रुपये तय की गई है। यह नियम 1 जुलाई 2026 से सभी वाणिज्यिक, क्षेत्रीय ग्रामीण और स्मॉल फाइनेंस बैंकों पर लागू होंगे।
मुआवजा पाने के लिए ग्राहक को धोखाधड़ी की शिकायत 5 दिनों के भीतर बैंक में करनी होगी। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर रिपोर्ट दर्ज कराना अनिवार्य होगा। यह सुविधा ग्राहकों को जीवन में केवल एक बार ही मिलेगी। मुआवजे के आर्थिक बोझ का 65 फीसदी हिस्सा रिजर्व बैंक, 10 फीसदी ग्राहक का बैंक और 10 फीसदी लाभार्थी बैंक वहन करेगा। आरबीआई ने निर्देश दिया है कि 500 रुपये से अधिक के हर इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर तत्काल एसएमएस अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा। बैंकों को सुरक्षित डिजिटल भुगतान और मजबूत धोखाधड़ी पहचान तंत्र विकसित करने के लिए अपनी नीति बनानी होगी।
धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करने का भार बैंक पर होगा। यदि बैंक की सिस्टम में कमी या तीसरे पक्ष की लापरवाही है, तो समय पर सूचना देने पर ग्राहक की कोई देनदारी नहीं होगी। हालांकि, यदि ग्राहक अपना पिन, ओटीपी या पासवर्ड किसी से साझा करता है या हानिकारक ऐप डाउनलोड करता है, तो इसे ग्राहक की लापरवाही माना जाएगा। ऐसी स्थिति में ग्राहक मुआवजे का हकदार नहीं होगा। बैंक को शिकायत मिलते ही अनधिकृत लेनदेन रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे।
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