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हिसार: विधायक जस्सी पेटवाड़ ने उठाया जलभराव व मुआवजे का मुद्दा
क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को लेकर नारनौंद के विधायक जस्सी पेटवाड़ ने विधानसभा में जोरदार तरीके से आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि नारनौंद विधानसभा का अधिकांश इलाका कृषि आधारित है और यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह खेती पर निर्भर करती है। ऐसे में पिछले वर्ष बारिश के मौसम में आई बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी। कई गांव जलमग्न हो गए थे और हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
विधायक ने सदन में बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के महीनों बाद भी डाटा, गुराना, सिंघवा राघो सहित कई गांवों में खेतों में पानी जमा रहा, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हुई। किसानों को अगली फसल की बुवाई तक में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सरकार के समक्ष आंकड़े रखते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र में व्यापक नुकसान के बावजूद केवल लगभग 300 किसानों को ही मुआवजा दिया गया। बास अकबरपुर में 8, बास बादशाहपुर में 3, बास खुर्द बीजान में 20, भकलाना में 17, मोहल्ला में 16, बड़छप्पर में 1, पुट्ठी समन में 24, सिंघवा खास में 1, डाटा में 36, गुराना में 59, मसूदपुर में 21, खानपुर में 1, सिसर में 20, खरबला में 2, बडाला में 16 और उगालन में 33 किसानों को ही राहत दी गई। विधायक ने इसे सरकार की लापरवाही करार देते हुए कहा कि जब पोर्टल पर हजारों किसानों ने फसल नुकसान का विवरण दर्ज कराया, तो इतनी कम संख्या में मुआवजा देना न्यायसंगत नहीं है। जस्सी पेटवाड़ ने मांग की कि जिन-जिन किसानों ने अपना नुकसान विधिवत दर्ज कराया है, उन सभी को पारदर्शी तरीके से मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि अन्नदाता पहले ही प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है, ऐसे में सरकारी उदासीनता उसके जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। विधायक ने सरकार से पुनः सर्वे कराने और वास्तविक नुकसान का आकलन कर सभी पात्र किसानों को शीघ्र राहत राशि प्रदान करने की मांग की, ताकि बाढ़ से प्रभावित किसानों को उनका पूरा हक मिल सके और वे दोबारा मजबूती के साथ खेती कर सकें।
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