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झज्जर में अमर उजाला की तरफ से अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया
वन स्टॉप सेंटर की कानूनी सलाहकार भारती ने कहा कि समाज में आज भी महिलाओं को पुरुषों से कमतर आंका जाता है जबकि महिलाएं आज हर फील्ड में पुरुषों के बराबर काम कर रही है। कहीं-कहीं तो उनसे आगे भी निकल रही है। उसके बावजूद महिलाओं को सामाजिक रूप से आजादी नहीं दी जा रही है। यह तभी संभव होगा, जब महिलाएं खुद आगे बढ़कर अपना हक मांगेंगी।
वह शुक्रवार को पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र में अमर उजाला की तरफ से आयोजित अपराजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि महिलाएं खुद को पुरुषों के बराबर समझें। महिलाएं शुरुआत से ही घर का माहौल ऐसा बनाए, जिसमें बच्चों लड़का और लड़का दोनों को ऐसे काम दें, जो दोनों करें। उन्हें यह सीखाए तो जो लड़का कर सकता है, वह लड़की भी कर सकती है और लड़की काम करती है, वह लड़कों को भी करने चाहिए। इससे भविष्य में सामाजिक रूप से उनको दिक्कत नहीं आएगी। वह आगे समाज में जाकर लड़का-लड़की के रूप में भेदभाव नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी लड़कियों को ज्यादा पढ़ने नहीं दिया जाता। बाहर नहीं जाने दिया जाएगा और नौकरी तक नहीं करने दी जाती, लेकिन यह बंदिशें केवल महिलाएं तोड़कर कर ही कर सकती है। उनको समाज को बताना चाहिए कि वह भी बहुत कुछ कर सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने हक की लड़ाई जरूर लड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार महिलाओं पर हिंसा के केस आते हैं और उनको लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है, इसलिए उनको धैर्य रखना चाहिए। कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए भी महिलाओं को सुविधाएं प्रदान की जाती है। सखी केंद्र में उनको आश्रय भी प्रदान किया जाता है।
ट्रेनर रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं को भी कई प्रकार के हक दिए गए हैं, जिनका प्रयोग सच्ची लड़ाई लड़ने के लिए करना चाहिए। पहले सीमित साधन होते थे, लेकिन आज साधन ज्यादा है और समय कम है। इसलिए एआई के जमाने पर महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई बार महिलाओं को कानूनी रूप से लड़ाई में न्याय मिल जाता है, लेकिन सामाजिक रूप से उनको स्वीकार नहीं किया जाता। इस सोच को बदलने की जरूरत है।
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