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Chants of devotion echoed at the Maa Bhimeshwari Devi Temple on the Ashtami of Gupt Navratri; thousands of devotees bowed in reverence at the Goddess's shrine and offered prayers.
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गुप्त नवरात्र की अष्टमी पर मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में गूंजे जयकारे ,हजारों श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में माथा टेक कर मन्नत मांगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बेरी। आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र के अष्टमी के दिन बेरी स्थित मां भीमेश्वरी मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। मंदिर में अलसुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी।
बता दें कि न केवल नवरात्र के दौरान अपितु हर माह आने वाली अष्टमी के दिन भक्तजन पूजा-अर्चना के लिए यहां आते हैं। अष्टमी के मौके पर परंपरानुसार भक्तों ने पवित्र सरोवर से मिट्टी निकालकर स्नान करके अपने परिवार की मंगल कामना की। अलसुबह करीब पांच बजे मां भीमेश्वरी की प्रतिमा को भीतर वाले भवन से बाहर वाले भवन लाया गया, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां का स्नान हुआ और भक्तों ने मंगला आरती की। मां भीमेश्वरी के दर्शनों का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात लगाकर और नवजात बच्चों के बाल उतरवाकर भक्तों ने पूजा की। पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ स्नान करवाया उसके बाद मंगला आरती करके मां के दर्शन भक्तों के लिए खोल दिए गए। बाहर वाले भवन में मां के दर्शनों का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा।
नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात, बच्चों के बाल उतरवाकर भक्तों ने पूजा अर्चना की। वहीं महिलाओं ने मां के मंदिर में पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नत मांगी। मां के दरबार में अष्टमी की भीड़ को देखते हुए पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई हुई थी। मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ का कहना है कि हर माह अष्टमी के दिन मां के दरबार में भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं। बेरी शहर चौकी प्रभारी अजीत सिंह ने बताया कि हर माह मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में अष्टमी के भक्तों की भीड़ उमड़ती है और कई राज्यों से भक्त मां के दरबार में माथा टेकने लिए पहुंचते हैं।
काफी प्राचीन है मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास
मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास अति प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार मां की मूर्ति को पांडु पुत्र भीम पाकिस्तान के हिंगजाल पर्वत से लेकर आए थे। भीम ने मां को अपने साथ चलने के लिए कहा तो मां ने पांडु पुत्र से कहा कि मैं तुम्हारे साथ तो चलुंगी, लेकिन तुम मुझे अपनी गोद में रखोगे। रास्ते में जहां भी उतारोगे मैं उस स्थान से आगे नहीं जाऊंगी। भीम ने मां का कहना माना और गोद में उठाकर युद्ध भूमि की तरफ चल पड़ा। जब भीम मां को लेकर बेरी कस्बे से गुजर रहा था तो भीम को लघुशंका के लिए उन्हें अपने कंधे से उतार दिया। बाद में माता को वापस चलने के लिए अपनी गोद में उठाने लगा तो वह नहीं उठ पाई। तभी मां भीमेश्वरी की यहां स्थापना हुई और महाभारत के युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना कर दी गई।
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