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Mandi: Plums from Balh and Sundernagar have reached markets in Maharashtra; the HP SHIVA Project has earned them a new identity
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Mandi: महाराष्ट्र की मंडियों में पहुंचा बल्ह व सुंदरनगर का प्लम, एचपी शिवा परियोजना ने दिलाई नई पहचान
Ankesh Dogra
Updated Wed, 03 Jun 2026 03:45 PM IST
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कृषि-बागवानी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में सुक्खू सरकार के प्रयास अब धरातल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। विशेषतौर पर बागवानी में आए क्रांतिकारी बदलाव ने ग्रामीणों की आय में कई गुना बढ़ोतरी सुनिश्चित की है। हिमाचल प्रदेश उपोष्णकटिबंधीय बागवानी, सिंचाई और मूल्यवर्धन (एचपी शिवा) परियोजना के समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन से यह संभव हो सका है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बागवानी विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। हिमाचल प्रदेश के निचले और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों को बागवानी के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में एचपी शिवा परियोजना के तहत उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हो रही है। मंडी जिले के विकास खंड बल्ह के बृखमणी क्लस्टर तथा सुंदरनगर के खग्राओं क्लस्टर में तैयार उच्च गुणवत्ता वाला प्लम अब महाराष्ट्र सहित देश के बड़े बाजारों तक पहुंचने लगा है। बागवानी विभाग के सहयोग और किसानों की मेहनत से तैयार इस फसल ने व्यावसायिक उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। परियोजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, प्रशिक्षण तथा बेहतर बाजार उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। खग्राओं के रहने वाले संजय कुमार बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2022 में एचपी शिवा परियोजना के तहत प्लम का बागीचा लगाया। उनके क्लस्टर से 26 किसान जुड़े हैं और लगभग 11.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्लम के पौधे लगे हैं। अल्प समय में ही उन्हें इससे अच्छी फसल और बेहतर दाम प्राप्त हो रहे हैं। इस बार लगभग तीन लाख रुपए की फसल उत्पादित कर चुके हैं। अकेले संजय कुमार ही लगभग दो लाख रुपए प्लम की पैदावार से प्राप्त कर चुके हैं। वे बताते हैं कि उत्कृष्ट क्वालिटी का यह प्लम कुल्लू व भुंतर सब्जी मंडी में अच्छे दामों पर बिक रहा है। उन्हें 220 रुपए से लेकर 235 रुपए प्रति किलोग्राम के दाम मिले हैं। संजय बताते हैं कि इस क्लस्टर में ब्लैक एंबर, सेंटा रोजा सहित चार किस्म के प्लम की पैदावार ली जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से क्लस्टर स्थापित करने में उन्हें हर तरह की मदद प्राप्त हुई है। इसमें पंप हाऊस, बोर वेल सहित अन्य आवश्यक उपकरण व सुविधाएं निःशुल्क प्राप्त हुई हैं। मनरेगा के तहत निर्माण कार्य में भी मदद मिली है। उद्यान विभाग की ओर से समय-समय पर तकनीकी सहयोग व विशेषज्ञ सहायता मिल रही है। इन किसान-बागवान हितैषी नीतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए उन्होंने प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है। प्रारंभिक वर्षों में लगाए गए प्लम के पौधों से सीमित मात्रा में उत्पादन प्राप्त हो रहा था, लेकिन इस वर्ष इन क्लस्टर में व्यावसायिक स्तर पर भरपूर उत्पादन शुरू हो गया है। फसल तैयार होने के साथ ही किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने के लिए बागवानी विभाग की टीम ने विशेष प्रयास किए हैं। विभाग द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में किसानों को फलों की वैज्ञानिक तुड़ाई एवं संभाल, सॉर्टिंग एवं ग्रेडिंग तथा बाजार से जोड़ने संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और एपीएमसी भुंतर मंडी में इन क्लस्टरों के प्लम को 150 रुपये से 230 रुपये प्रति किलोग्राम तक का आकर्षक मूल्य प्राप्त हुआ है। बागवानी विभाग के उप निदेशक संजय गुप्ता ने बताया कि किसानों को स्थानीय मंडियों तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर के कॉर्पोरेट एवं प्रीमियम बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य से एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित एग्री-सप्लाई कंपनी गो फॉर फ्रेश (GO4FRESH) के साथ संपर्क स्थापित किया गया है। इन क्लस्टर से तैयार प्लम की पहली नमूना खेप महाराष्ट्र के लिए भेजी गई है। यह उपलब्धि न केवल मंडी जिले के बागवानों के लिए उत्साहवर्धक है, बल्कि प्रदेश में उप-उष्णकटिबंधीय फल उत्पादन की अपार संभावनाओं को भी दर्शाती है। भविष्य में ऐसे प्रयासों से किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य तथा आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
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