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World Breastfeeding Week 2026: स्तनपान से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है कम, 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध जरूरी
Ankesh Dogra
Updated Thu, 06 Aug 2026 10:21 AM IST
मां का दूध नवजात के लिए सबसे संपूर्ण और प्राकृतिक आहार माना जाता है, लेकिन इसके फायदे केवल बच्चे तक ही सीमित नहीं हैं। नियमित स्तनपान कराने से मां के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्तनपान कराने वाली महिलाओं में भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा कम हो सकता है। इसी संदेश के साथ विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर मंडी जिला में स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियान चला रहा है।
हर वर्ष 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसूता महिलाओं को स्तनपान के महत्व और सही तरीके के बारे में जानकारी दे रहा है। अभियान का उद्देश्य नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के साथ माताओं को भी स्तनपान के दीर्घकालिक लाभों के प्रति जागरूक करना है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) मंडी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि हर प्रसूता महिला को बच्चे को हर दो घंटे के अंतराल पर या उसकी जरूरत के अनुसार स्तनपान कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि मां के दूध में ऐसे पोषक तत्व और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व होते हैं, जिनकी पूर्ति किसी अन्य दूध या आहार से नहीं हो सकती। यही कारण है कि जन्म के बाद पहले छह महीने तक शिशु को केवल मां का दूध देने की सलाह दी जाती है।
उन्होंने बताया कि स्तनपान से बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। साथ ही संक्रमण और कई अन्य बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। दूसरी ओर, नियमित स्तनपान कराने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसलिए यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
सीएमओ ने यह भी कहा कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस दौरान पौष्टिक और संतुलित आहार पर्याप्त मात्रा में लेना जरूरी है, ताकि शरीर में पर्याप्त दूध का निर्माण हो सके। यदि मां स्वयं पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं करेगी तो इसका असर उसके स्वास्थ्य के साथ-साथ बच्चे के पोषण पर भी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रसूता महिलाओं से नियमित स्तनपान और संतुलित आहार अपनाने की अपील की है।
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