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MP News: दावे करोड़ों के, हकीकत शून्य, सरकारी कागजों में 'बेटी पढ़ाओ',जंगल के डर से थम रही बेटियों की पढ़ाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर Published by: बुरहानपुर ब्यूरो Updated Wed, 08 Jul 2026 11:42 AM IST
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सरकार हर साल 'स्कूल चलें हम' अभियान चलाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का दावा करती है, लेकिन बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र का आदिवासी ग्राम बाकड़ी आज भी इस अभियान की हकीकत बयां कर रहा है। गांव में हाईस्कूल नहीं होने के कारण यहां की बेटियां आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। गांव से करीब 12 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते स्कूल होने की वजह से अभिभावक अपनी बेटियों को आगे पढ़ने के लिए भेजने से डरते हैं। इसका असर यह है कि पिछले पांच वर्षों में सैकड़ों आदिवासी छात्राएं शिक्षा से वंचित हो गईं, जबकि कई की कम उम्र में ही शादी हो गई।
आठवीं के बाद थम जाते हैं बेटियों के सपने
बाकड़ी गांव में हाईस्कूल नहीं होने का सबसे बड़ा असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ रहा है। पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद दूरी और सुरक्षा की चिंता के कारण उनकी पढ़ाई आठवीं कक्षा के बाद ही रुक जाती है। किताबों और स्कूल की जगह उनके हिस्से में घर की जिम्मेदारियां आ जाती हैं। इस वर्ष गांव के 34 विद्यार्थियों ने आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की। इनमें से केवल आठ लड़कों ने ही नौवीं कक्षा में प्रवेश लिया, जबकि एक भी छात्रा आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं पहुंच सकी।
12 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते भेजने से डरते हैं अभिभावक
ग्रामीण अखंड सिंह, शंकर मेहता और जगन्नाथ सिंह का कहना है कि गांव से करीब 12 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते होकर स्कूल जाना पड़ता है। ऐसे में बेटियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है। इसी कारण वे चाहकर भी उन्हें आगे पढ़ने के लिए नहीं भेज पाते। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हाईस्कूल खोलने की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की उदासीनता के चलते आज तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी। इसका खामियाजा गांव की बेटियों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रस्ताव और सर्वे हुए, लेकिन स्कूल आज तक नहीं बना
भातखेड़ा के जन शिक्षक राजेश कापड़े ने बताया कि गांव में हाईस्कूल शुरू करने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए। स्कूल निर्माण के लिए जमीन भी चिन्हित की गई और सर्वे भी कराया गया, लेकिन आज तक हाईस्कूल शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि अब मामला मीडिया के सामने आने के बाद विभाग ने फिर से प्रस्ताव भेजने की बात कही है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इतने वर्षों तक इन बेटियों के भविष्य की चिंता क्यों नहीं की गई।
अधिकारी बोले- शासन को भेजा गया है प्रस्ताव
जिला संयोजक आदिम जाति विभाग अधिकारी भरत राजपुरे ने बताया कि हाईस्कूल निर्माण के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और उन्हें शासन स्तर पर भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलने के बाद स्कूल निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बाकड़ी गांव की बेटियां केवल एक हाईस्कूल की दूरी के कारण अपने सपनों से दूर होती जा रही हैं। अब देखना होगा कि विभाग का आश्वासन कब हकीकत में बदलता है और गांव की बेटियों को अपने ही गांव में आगे की पढ़ाई का अधिकार कब मिल पाता है।
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