केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों, आदिवासी परिवारों और ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने छतरपुर से दतिया पहुंचकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें तथ्यात्मक ज्ञापन सौंपते हुए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने किया। उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल के विरोध का आंदोलन नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों के संवैधानिक अधिकार, सम्मानजनक पुनर्वास और न्याय की लड़ाई है। भटनागर ने आरोप लगाया कि 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कानून (LAR Act 2013) के प्रावधानों के पालन को लेकर गंभीर सवाल हैं।
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उन्होंने 9 फरवरी 2026 को अपनी गिरफ्तारी सहित आंदोलन के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई, कथित दमन और ग्रामीणों पर दर्ज मामलों का मुद्दा उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पानी की बौछार, लाठीचार्ज और मारपीट जैसी घटनाएं हुईं, जिसमें कई लोग घायल हुए और वाहनों को नुकसान पहुंचा। फर्जी मुकदमे दर्ज कर भय का माहौल बनाने का भी आरोप लगाया गया। ज्ञापन में मांग की गई कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वतंत्र तथ्य-जांच कराई जाए, संसद और राष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठाया जाए तथा दर्ज मामलों में न्यायपूर्ण हस्तक्षेप हो। ग्रामीणों से प्रत्यक्ष संवाद के लिए क्षेत्र भ्रमण का आग्रह भी किया गया।
अखिलेश यादव ने पूरी बात सुनने के बाद कहा कि विकास के नाम पर किसानों और आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने पारदर्शी सर्वे और कानून के पालन का समर्थन करते हुए मामले को गंभीरता से उठाने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में पार्षदों सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

दतिया पहुंचे अखिलेश यादव
छतरपुर के प्रतिनिधिमंडल का ज्ञापन पढ़ते अखिलेश यादव