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Now a great battle erupted over reception being held name of Mahakal, priest federation
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Ujjain News: महाकाल के नाम पर हो रहे रिसेप्शन पर अब महासंग्राम, भड़के पुजारी महासंघ ने कह दी ये बड़ी बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sun, 22 Feb 2026 05:24 PM IST
भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपरांत आयोजित किए जा रहे रिसेप्शन को लेकर अब अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इस आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ एक धार्मिक विकृति करार दिया है। महासंघ का स्पष्ट कहना है कि महादेव की बरात निकालने या उनका रिसेप्शन देने का सामर्थ्य किसी भी मनुष्य में नहीं है।
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने तीखे शब्दों में इस आयोजन का विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान के नाम से भंडारा करना या प्रसादी वितरण करना पुण्य का कार्य है, जिसे समाज सहर्ष स्वीकार करता है। लेकिन भगवान शिव के विवाह के नाम पर बाकायदा रिसेप्शन की पत्रिकाएं छपवाना और बरात का प्रदर्शन करना सरासर गलत है। रूपेश मेहता के अनुसार, हमारे धर्मग्रंथों में प्रसादी और भंडारे का विधान है, रिसेप्शन जैसी पाश्चात्य परंपराओं का नहीं। यदि आज इस तरह की विकृतियों को नहीं रोका गया, तो भविष्य की पीढ़ी शास्त्रों को छोड़कर किए जा रहे दिखावे को ही धर्म मान लेगी।
दोनों पक्षों के तर्क
महासंघ ने आयोजकों को आइना दिखाते हुए कहा कि शिव की बरात में भूत-प्रेत, नंदी और समस्त जीव-जगत शामिल होता है; उस ऊर्जा को वहन करना किसी साधारण इंसान के बस की बात नहीं है। पुजारी महासंघ ने आयोजकों से पुरजोर अपील की है कि वे इसे रिसेप्शन का नाम देना तुरंत बंद करें और इसे श्रद्धापूर्वक 'महाशिवरात्रि प्रसादी' के रूप में आयोजित करें, अन्यथा धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचती रहेगी। आयोजक समिति के सदस्य महेंद्र कटियार ने बताया कि हम भगवान शिव के विवाह के रूप में ही इसे मानते हुए आए हैं और हम अपने भाव से इसे मानते हैं। समिति और जनता के सहयोग से हम यह आयोजन करते हैं। रिसेप्शन में कई लोग भोजन प्रसादी लेने के लिए पहुंचते हैं।
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