विदेश में रहकर उच्च शिक्षा हासिल करना देश के हर एक नवयुवा का सपना होता है, लेकिन यह सपना सबका पूरा नहीं हो पता । हालांकि मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के सुदूर आदिवासी अंचल के ग्रामीण क्षेत्र में जन्मे, एक वंचि त आदिवासी समाज से आने वाले, गरीब किसान के पुत्र का, यह सपना अब पूरा होने वाला है । यह युवक मध्य प्रदेश सरकार से मिलने वाली विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत, इंग्लैंड के लंदन में जाकर, वहां की यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर की डिग्री पूरी करने वाला है । आदिवासी युवक का यह सपना प्रदेश सरकार की योजना के तहत 100% स्कॉलरशिप सहायता के जरिए पूरा किया जाएगा। जिसके चलते युवक का विदेश जाने से लेकर, वहां रहने खाने पीने और साल भर तक पढ़ाई करने में आने वाला करीब 35 लाख का खर्चा भी प्रदेश सरकार के द्वारा उठाया जाएगा।
खंडवा जिले के आदिवासी अंचल खालवा ब्लॉक के ग्राम गारबेड़ी का रहने वाले आदिवासी कोरकू समाज का युवक आशाराम पालवी का पढ़ाई के प्रति बचपन से ही बेहद लगाव था। उसकी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से शुरू हुई, जिसके बाद छठी क्लास से उसने जवाहर नवोदय विद्यालय खंडवा में एडमीशन लिया। यहां से कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद बेहतर परिणाम और कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत उसका चयन कर्नाटक की सेंट्रल यूनिवर्सिटी कर्नाटक में हुआ। जहां से उसने भूगर्भ शाखा में ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद वह आहे की पढ़ाई करने के लिए लंदन जाना चाहता था । लेकिन घर की माली हालत के कारण उसका यह सपना लगभग टूटने ही वाला था।
मंत्री विजय शाह के प्रयासों से मिली स्कॉलरशिप
माता-पिता के इंकार के बाद उसकी यह उम्मीद टूट ही रही थी कि, तभी आशाराम ने एक दोस्त से मदद मांगी। फिर इस तरह से बात प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह तक पहुंची और मंत्री विजय शाह से मुलाकात कर आशाराम ने उन्हें अपनी समस्या बताई। जिसके बाद जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा चलाई जा रही विदेशी अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत मंत्री विजय शाह के प्रयासों से आशाराम को मप्र. शासन की ओर से 35 लाख रूपए की स्कॉलरशिप, लंदन में हायर एज्यूकेशन हासिल करने के लिए स्वीकृत की गई है। जिससे अब वो लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ लाइस्टर से जियो ग्राफिकल इन्फॉर्मेशन साइंस में एमएससी कर सकेगा।
रविवार को सीएम भी करेंगे आशाराम से मुलाकात
बता दें कि, आशाराम पालवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उसका परिवार आदिवासी समुदाय से है और परिजन गरीब किसान हैं । बूढ़े-माता और आशाराम एक झोपड़ी में रहते हैं। परिवार के पास करीब 5 से 6 एकड़ भूमि है । जिस पर मेहनत कर किसी तरह माता-पिता ने जितना हो सका बेटे को पढ़ाया । जिसके बाद जब विदेश में जाकर पढ़ाई करने की बात आशाराम ने माता-पिता से कही तो पैसे न होने की बात कहकर उन्होंने इससे इंकार कर दिया था। बता दें कि, रविवार को मुख्यमंत्री डॉ, मोहन यादव भी खंडवा के खालवा आएंगे और जनजातीय छात्र प्रोत्साहन व सम्मान कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार की सहायता से विदेश पढ़ने जा रहे युवक आशाराम पालवी से भी वे मुलाकात करेंगे।
प्रदेश सरकार देगी विदेश अध्ययन का पूरा खर्च
वहीं आशाराम पालवी को यह स्कॉलरशिप जनजातिय कार्य विभाग की ओर से मिल रही है। जिसके लिए उसके द्वारा भोपाल में आवेदन किया गया था। वहीं इसको लेकर आदिम जाति विभाग की सहायक आयुक्त आशा चौहान ने बताया की जनजातिय कार्य विभाग की एक योजना है जिसका नाम विदेश अध्ययन योजना है। इस योजना में 2003 से लेकर अब तक प्रदेश के करीब 70 बच्चे इस योजना में चयनित हुए हैं। अभी वर्तमान में खँडवा जिले के आशाराम पालवी का चयन हुआ है लंदन के लिए, और वह इस योजना के माध्यम से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए विदेश जा रहे है। उनकी पढ़ाई की स्कॉलरशिप का खर्च मध्य प्रदेश सरकार देंगी।