मध्य प्रदेश के मैहर की पावन मां शारदा नगरी केवल शक्तिपीठ के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन शिव मंदिरों के लिए भी विख्यात है। इन्हीं में से एक है गोलामाठ क्षेत्र में स्थित भगवान भोलेनाथ का प्राचीन मंदिर, जिसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता दूर-दूर तक मानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर लगभग 1600 वर्ष प्राचीन है और इसका निर्माण चोल वंश के शासकों द्वारा कराया गया था।
एक दिन में निर्माण की मान्यता
मंदिर को लेकर क्षेत्र में एक प्रचलित मान्यता है कि इसका निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने एक ही दिन में किया था। इसी कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। प्राचीन स्थापत्य शैली और पत्थरों की बनावट इस मंदिर को ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
प्रतिदिन होता है भव्य श्रृंगार और पूजा-अर्चना
मंदिर में प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। सुबह और शाम आरती के समय भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें फूलों, बेलपत्र और भस्म से अलंकरण किया जाता है। मंदिर के श्रृंगार पुजारी चूड़ामणि बड़ौलिया ने बताया कि यहां वर्षों से नियमित रूप से पूजा-पाठ की परंपरा चली आ रही है और दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।
आस्था और इतिहास का संगम
गोलामाठ स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि मैहर की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना करते हैं। मैहर की पवित्र धरती पर स्थित यह मंदिर आज भी अटूट श्रद्धा, प्राचीन इतिहास और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बना हुआ है, जहां हर दिन आस्था का दीप प्रज्ज्वलित होता है।