सीहोर स्थित कुबेरेश्वरधाम में आयोजित छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव बुधवार को भक्ति, श्रद्धा और सेवा के अभूतपूर्व संगम के साथ संपन्न हो गया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पिछले 6 दिन में देशभर से पहुंचे लगभग 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन, गुरु दर्शन, सत्संग और गुरु दीक्षा में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। महोत्सव के अंतिम दिन धाम में एक किलोमीटर लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं ने गुरु दर्शन किए, जबकि पूरा परिसर हर-हर महादेव और जय गुरुदेव के जयघोष से गूंजता रहा।
एक किलोमीटर लंबी कतारों में श्रद्धालुओं ने किए गुरु दर्शन
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब कुबेरेश्वरधाम पहुंचना शुरू हो गया था। गुरु पूजन और दर्शन के लिए श्रद्धालु घंटों तक कतारों में खड़े रहे। धाम परिसर में लगभग एक किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं। इसके बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने पूरे अनुशासन के साथ दर्शन कर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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सच्चा गुरु वही, जिसका जीवन समाज के लिए प्रेरणा बने : पंडित प्रदीप मिश्रा
अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कहा कि सच्चा गुरु वही होता है जिसका जीवन, आचरण और व्यवहार समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने कहा कि परमात्मा से बड़ा हितैषी कोई नहीं है और भगवान ही समस्त सृष्टि के वास्तविक गुरु हैं। उन्होंने माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को गुरु स्वीकार करने का उल्लेख करते हुए गुरु परंपरा का महत्व बताया और कहा कि कुबेरेश्वरधाम आने वाला प्रत्येक भक्त केवल शिव का भक्त है।
चार गुरु बनाते हैं जीवन को संस्कारित और सफल
अपने प्रवचन में पंडित मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में माता, पिता, शिक्षक और सद्गुरु चार ऐसे गुरु हैं, जिनके मार्गदर्शन से जीवन संस्कारित, सफल और सार्थक बनता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि किसी भी व्यक्ति को गुरु बनाने से पहले उसके जीवन, व्यवहार और आचरण को अवश्य परखें, क्योंकि गलत मार्गदर्शन जीवन में भ्रम और भटकाव पैदा कर सकता है।
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देवर्षि नारद के प्रसंग से दिया गुरु महिमा का संदेश
प्रवचन के दौरान उन्होंने देवर्षि नारद और भगवान विष्णु का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु के निर्देश पर नारद जी ने पृथ्वी पर सबसे पहले मिले मछुआरे से गुरु मंत्र ग्रहण किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि सच्चा ज्ञान किसी भी माध्यम से प्राप्त हो सकता है और सद्गुरु मनुष्य को 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं।
25 क्विंटल नुक्ति का भोग, हजारों सेवादारों ने निभाई सेवा
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लगभग 25 क्विंटल नुक्ति का भोग अर्पित किया गया। विठलेश सेवा समिति के पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित हजारों सेवादारों ने श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी वितरित की। भोजन, पेयजल, यातायात, पार्किंग, चिकित्सा सहायता और श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन की व्यवस्थाएं पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ संचालित की गईं।
व्यासपीठ से पंडित प्रदीप मिश्रा ने महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, पुलिस विभाग, चिकित्सा विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग, यातायात पुलिस, रेल विभाग, निजी अस्पतालों की चिकित्सा टीम, विठलेश सेवा समिति के हजारों सेवादारों तथा समाचार कवरेज करने वाले पत्रकारों का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के समन्वय और सेवा भावना के कारण लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद आयोजन शांतिपूर्ण और सफल रहा।
रेलवे की विशेष व्यवस्था से श्रद्धालुओं को मिली बड़ी राहत
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सीहोर रेलवे स्टेशन पर 10 अतिरिक्त ट्रेनों का ठहराव दिया गया। इससे देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में काफी सुविधा मिली। रेलवे ने आगामी सावन माह और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए भी विशेष ट्रेनों और अतिरिक्त स्टॉपेज की व्यवस्था की है।

कुबेरेश्वरधाम में उमड़ा भक्ति का महासागर
कुबेरेश्वरधाम में लगी लंबी-लंबी कतारें।
कुबेरेश्वरधाम में दूर-दूर से पहुंचे भक्त।