सीहोर जिले की श्यामपुर तहसील के ग्राम निवारिया में जमीन को लेकर विवाद अब हाई-वोल्टेज टकराव में बदल गया है। एक ओर रजिस्ट्रीधारी महिला न्याय की गुहार लगा रही है, तो दूसरी ओर राजस्व प्रशासन अपनी कार्रवाई को पूरी तरह वैधानिक बता रहा है। मामला इतना गंभीर हो गया है कि अब प्रशासनिक कार्रवाई, दस्तावेजों की वैधता और न्यायिक आदेशों की व्याख्या सवालों के घेरे में आ गई है। गांव में इस विवाद ने सनसनी फैला दी है और लोग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
महिला ने लगाया बिना सुनवाई कब्जा दिलाने का आरोप
ग्राम श्यामपुर निवासी श्रीमती रामकुंवर भाटी पत्नी सत्य नारायण भाटी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी स्वामित्व वाली भूमि पर प्रशासन ने बिना उचित सुनवाई के दूसरे पक्ष को शनिवार को कब्जा दिला दिया। उनका कहना है कि उन्होंने समय रहते लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं, रजिस्टर्ड विक्रय पत्र सहित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए, फिर भी उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। रामकुंवर भाटी का आरोप है कि प्रशासन ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए एकतरफा कार्रवाई की है। उनके अनुसार उन्हें किसी भी स्तर पर नोटिस नहीं दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर मिला।
भूमि पर स्वामित्व और कब्जे का दावा
पीड़िता के अनुसार ग्राम निवारिया स्थित खसरा क्रमांक 379/68/1/2/1 रकबा 0.022 हेक्टेयर एवं खसरा क्रमांक 379/68/1/2/2 रकबा 0.042 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में उनके नाम दर्ज है। उन्होंने बताया कि भूमि का डायवर्सन भी स्वीकृत कराया जा चुका है। महिला का कहना है कि उक्त भूमि पर वर्षों से उनका वैध कब्जा है। मौके पर सीमेंट पोल की फेंसिंग, तारबंदी और ट्यूबवेल भी स्थापित है। ऐसे में अचानक दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने की कार्रवाई ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
19 जून को आपत्ति के बाद रुकी थी कार्रवाई
रामकुंवर भाटी ने बताया कि 19 जून 2026 को राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी कब्जा कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचे थे। उस समय उन्होंने लिखित आपत्ति के साथ सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। उनका कहना है कि आपत्ति लेने के बाद अधिकारियों ने उस दिन कार्रवाई स्थगित कर दी थी और पंचनामा भी तैयार किया गया था। मौके पर यह स्वीकार किया गया था कि भूमि पर उनका कब्जा है और उन्होंने दस्तावेज भी पेश किए हैं। यही कारण है कि परिवार को उम्मीद थी कि जांच पूरी होने तक कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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कलेक्टर को शिकायत, फिर भी हुई कार्रवाई
पीड़ित परिवार के अनुसार 23 जून 2026 को कलेक्टर सीहोर को विस्तृत शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई थी। शिकायत में सीमांकन, बंटवारे और कब्जा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। परिवार का आरोप है कि शिकायत लंबित रहने और जांच विचाराधीन होने के बावजूद 3 जुलाई को राजस्व अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा और दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया। इस कार्रवाई ने परिवार को हैरान कर दिया। उनका कहना है कि जब मामला कलेक्टर स्तर पर विचाराधीन था, तब इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई समझ से परे है।
परिवार बोला-20 साल पुरानी जमीन पर कब्जा
पीड़िता परिवार की सदस्य बबीता भाटी ने कहा कि यह जमीन लगभग 20 वर्षों से परिवार के कब्जे में है। जमीन उनकी सास रामकुंवर बाई के नाम पर रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि तहसीलदार और पुलिस बल की मौजूदगी में उनकी जमीन पर कब्जा दिलाया गया। परिवार का कहना है कि प्रशासन ने दस्तावेज देखने के बावजूद उनकी आपत्तियों को अस्वीकार कर दिया। बबीता ने स्पष्ट कहा कि परिवार अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और न्याय की मांग कर रहा है।
तहसीलदार ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, तहसीलदार श्याम नंदन चंदेले ने महिला के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और विधिवत प्रक्रिया के तहत की गई। तहसीलदार के अनुसार न्यायालय में सीमांकन और सुनवाई के बाद धारा 250 के तहत अनावेदक का कब्जा हटाने के आदेश पारित किए गए थे। मौके पर मौजूद लोगों द्वारा रजिस्ट्री और नोटिस का मुद्दा उठाया गया था। अधिकारी ने कहा कि संबंधित रजिस्ट्री की भूमि विवादित भूखंड से अलग स्थान पर है। वर्तमान भूमि पर सत्यनारायण भाटी का अवैध कब्जा पाया गया था।
अब जांच और न्याय पर टिकी नजरें
पूरा मामला अब प्रशासनिक और कानूनी जांच का विषय बन चुका है। एक ओर महिला अपने दस्तावेजों के आधार पर न्याय की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर प्रशासन अपने कदम को कानूनी बता रहा है। गांव में इस विवाद को लेकर तनावपूर्ण माहौल है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और संभावित जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिला तो मामला उच्च अधिकारियों से लेकर सक्षम न्यायालय तक पहुंच सकता है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।