टीकमगढ़ जिले के बखतपुरा गांव में प्रशासन के दावे और प्रयास ग्रामीणों के लिए खाली साबित हो रहे हैं। तांत्रिक किया के बाद दो लोगों की मौत ने ग्रामीणों में इतना भय व्याप्त कर दिया है कि प्रशासन के लाख प्रयास और दावों के बावजूद भी ग्रामीण सहमे हैं और बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। इसी घटना को परत दर परत खुलासा करती यह रिपोर्ट।
टीकमगढ़ के पलेरा ब्लॉक का गांव बखतपुरा करीब 4,000 की आबादी वाले गांव में लोगों की जिंदगी खेती पर आधारित है। इसी गांव में कुछ दिन पूर्व पांच लोगों ने मिलकर के तांत्रिक क्रिया की थी, जिसमें तंत्र क्रिया करने वाले रामनारायण राजपूत उम्र 45 वर्ष और प्रमोद विश्वकर्मा उम्र शक्ति 37 वर्ष की मौत हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है, यह दोनों मौतें तांत्रिक क्रिया के बाद हुई है। ग्रामीणों में दोनों मौतों को लेकर इतना भय बैठा कि शाम ढलते ही सभी लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं और स्कूल में बच्चों को भेजना बंद कर दिया। यह दोनों मौतें 25 सितंबर और 26 सितंबर को हुई। इसकी सूचना टीकमगढ़ जिला प्रशासन के अधिकारियों को 28 सितंबर की शाम लगी कि गांव में तांत्रिक क्रिया से दो लोगों की मौत हो गई है, इसके बाद गांव में दहशत है और स्कूल बंद है और बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर के आसपास यह गांव स्थित है। जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के पास जब इस तरह की सूचना प्राप्त हुई तो जिला प्रशासन ने पलेरा ब्लॉक की मेडिकल ऑफिसर और पलेरा पुलिस थाने के प्रभारी को गांव भेजा। जहां पर दोनों लोगों ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से चर्चा की 29 सितंबर को दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया और कहा कि इस तरह का भ्रम है और जिन दोनों लोगों की मौत हुई है, उन दोनों लोगों को अलग-अलग एक को डेंगू तो दूसरे को हड्डी का बुखार था। इसके बाद मलेरिया की टीम 30 सितंबर को गांव पहुंचती है, जिसमें टीम पाती है कि करीब 60 घरों में डेंगू का लारवा है और चार लोगों में डेंगू के लक्षण हैं। लेकिन ग्रामीण मलेरिया टीम को सहयोग नहीं करती है।
ग्रामीणों का दावा, रात में आती है प्रेत आत्मा
बुधवार की सुबह मीडिया की टीम भी गांव में पहुंचती है। लेकिन गांव की गलियों में ग्रामीण बच्चों की गूंजने वाली किलकारी बंद थी और सन्नाटा पसरा हुआ था। गांव के ही रहने वाले रिंकू से जब बात हुई तो उन्होंने प्रशासन के दावों के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि जिन दो लोगों की मौत हुई है, वह किसी बीमारी से नहीं बल्कि तांत्रिक क्रिया से हुई है। इसलिए ग्रामीण दहशत में हैं और शाम छह बजते ही सभी लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं। वहीं, गांव के रहने वाले अमोले राजपूत कहते हैं कि प्रेत आत्मा कभी औरत के रूप में तो कभी व्यक्ति के रूप में दिन हो या रात ग्रामीणों को दिखती है, जिस कारण से लोग दहशत में उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। लेकिन प्रशासन के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। उनका मानना है कि इसके साथ ही यह प्रेत आत्मा कई लोगों को पछार लगा चुकी है।
थाना प्रभारी बोले, ग्रामीणों में भय का भूत
पलेरा पुलिस थाने की प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा तांत्रिक किया के बाद दो लोगों की मौत बीमारी से हुई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें भी पता चला था कि रात्रि में प्रेत आत्मा गांव में आती है। उन्होंने कहा कि वह रात्रि में लगातार गश्त कर रहे हैं और लोगों को समझा रहे हैं। लेकिन उन्हें कहीं प्रेत आत्मा नजर नहीं आई है। उनका मानना है कि यह लोगों का भ्रम है, जो उनके दिल और दिमाग में बैठ गया है, जिसको निकालने में अब समय लगेगा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में जागरुकता का काम कर रही है। लोगों को समझाइश दे रही है, जिससे कि लोग अंधविश्वास से निकलकर आम जिंदगी का जीवन जी सकें।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर डालने के बाद निश्चित ही कहा जा सकता है कि ग्रामीणों में भय का भूत बना हुआ है। क्योंकि जिस तरह से ग्रामीण दावा कर रहे हैं और प्रशासन के आला अधिकारी अपने अपने तर्क दे रहे हैं तो निश्चित ही विज्ञान के युग में इसे भय का भूत कहेंगे जो ग्रामीणों के दिल और दिमाग में बैठा है, जिसे निकालने में समय लगेगा। टीकमगढ़ जिला प्रशासन के अधिकारियों को चाहिए कि वह तांत्रिक क्रिया में फंसे पूरे गांव को शीघ्र जल्द से जल्द बाहर निकाले, जिससे सभी ग्रामीण और बच्चे अपनी सुकून की जिंदगी जी सकें और बच्चों की किलकारियां फिर से गांव की गलियों में गूंज सके।