मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले की ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी ओरछा से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जो विकास और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। यहां पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं, और इसकी वजह है गैस सिलिंडर की किल्लत को लेकर फैली अफवाह।
दरअसल, ओरछा तहसील में इन दिनों गैस सिलिंडर की कमी की अफवाह ने लोगों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि महिलाएं, बुजुर्ग और यहां तक कि छोटे बच्चे भी नदी पार कर दूसरी ओर से लकड़ियां लाने के लिए मजबूर हैं। यह सफर बेहद खतरनाक है—फिसलन भरे पत्थर, गहरी धारा और हर पल हादसे का खतरा। लेकिन मजबूरी ऐसी है कि लोग अपनी जान की परवाह किए बिना यह जोखिम उठा रहे हैं।
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यह स्थिति उस दौर की याद दिलाती है जब ग्रामीण इलाकों में खाना बनाने के लिए केवल लकड़ी के चूल्हों पर निर्भर रहना पड़ता था। जबकि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लाखों परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, इसके बावजूद अफवाह ने लोगों को फिर से पुराने तरीकों की ओर धकेल दिया है। लकड़ी के चूल्हों से उठने वाला धुआं न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालता है।
वहीं प्रशासन इस पूरे मामले को अफवाह का परिणाम बता रहा है। खाद्य आपूर्ति अधिकारी सरिता अग्रवाल के अनुसार, जिले में गैस सिलिंडरों की कोई कमी नहीं है। प्रतिदिन 1326 सिलिंडरों का स्टॉक उपलब्ध है, जबकि केवल 590 सिलिंडरों की ही बुकिंग हो रही है। यानी आंकड़ों के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।