अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को लेकर रविवार को एक विवाद सामने आया था, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी महाराज ने मंगलनाथ मार्ग पर श्री पंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़े में संतों और महंतों के बीच कहा था कि वह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं और उन्हें 8 अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है। महानिर्वाणी अखाड़ा सचिव रवींद्र पुरी द्वारा किए गए इस दावे के बाद अध्यक्ष पद को लेकर काफी तरह की चर्चाएं होने लगीं। क्योंकि इसके पहले तक निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज भी अपने आपको अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बताते रहे हैं। लेकिन, इस नए दावे के बाद कोई भी यह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर असली अखाड़ा परिषद अध्यक्ष कौन है।
महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव रवींद्र पुरी द्वारा 8 अखाड़े का समर्थन होने और खुद को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बताए जाने के बाद सोमवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज उज्जैन पहुंचे। उन्होंने इस मामले में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सपना देखना सभी का हक है। प्रत्येक व्यक्ति जो राजनीति करता है वह अपने आपको बड़े पद पर आसीन होना देखना चाहता है। अखाड़े के अध्यक्ष का चुनाव भी सभी लोगों की सहमति से होता है एजेंडा जारी किया जाता है और सभी अखाड़े के प्रतिनिधि दस्तखत कर अपने अध्यक्ष का चुनाव करते हैं, तब जाकर यह प्रक्रिया पूरी होती है। 26 में से 2 अखाड़े के प्रतिनिधियों को छोड़ दिया जाए तो सभी हमारे साथ हैं।
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महामंत्री हरि गिरि महाराज ने कहा कि हां यह बात सही है कि वैष्णव अखाड़े के प्रतिनिधि चुनाव के दौरान हमारे साथ नहीं थे, लेकिन इस अखाड़े के अन्य प्रतिनिधियों ने प्रयागराज में हमें समर्थन दिया है। इसके दस्तावेज और प्रमाण हमारे पास है। दावा कोई भी कर सकता है, लेकिन यह कहना कि मैं अध्यक्ष हूं इसका मैं बुरा नहीं मानूंगा। वैष्णव अखाड़े के अलग-अलग प्रतिनिधि हमारे साथ हैं। आपने यह भी कहा कि कुछ समय पहले हमने अखाड़े की जमीन को अपने नाम पर करने वाले संत महंतों के खिलाफ जांच का निवेदन मेला अधिकारी से किया था, यह जांच शुरू भी हो चुकी है और उसके बाद ही अब इस तरह के लोग सामने आने लगे हैं। क्योंकि हमारे जिम्मे सिंहस्थ करवाने की जिम्मेदारी है। इसीलिए हम चाहते हैं कि अखाड़े की जमीन अखाड़े के नाम पर ही रहे, किसी संत महंत के नाम पर नहीं। इसीलिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
बाबा महाकाल का लिया आशीर्वाद
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमंत हरिगिरि महाराज बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाने पहुंचे। जहां उन्होंने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और दंडवत प्रणाम भी किया।
नियमों की अनदेखी पर उठाए सवाल
अखाड़ा परिषद की कार्यप्रणाली और हालिया बैठकों पर सवालिया निशान लगाते हुए महाराज ने कहा कि अध्यक्ष या महामंत्री का चयन किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं, बल्कि 13 अखाड़ों की सहमति और निर्धारित नियमों से होता है। उन्होंने पूछा कि क्या चुनाव के लिए कोई एजेंडा था? क्या तीन महीने पहले नियमानुसार नोटिस दिया गया था? महाराज ने स्पष्ट किया कि किसी भी संगठन का एक संविधान होता है और देहांत के बाद बैठक बुलाने का अधिकार केवल उसे ही है जिसके पास विधिवत कार्यवाही रजिस्टर और एजेंडा हो।