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Ujjain News: Bhasma Aarti Skipped, 11-Foot Sehra Adorns Mahakal as Groom, Saptadhan Shringar Performed
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Ujjain News: आज नहीं हुई भस्म आरती, 11 फीट का सेहरा सजाकर बाबा महाकाल बने दूल्हा, सप्तधान से हुआ शृंगार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Mon, 16 Feb 2026 07:56 AM IST
महाशिवरात्रि के अगले दिन आज उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भव्य आयोजन हुआ। दरअसल आज सोमवार को भगवान महाकाल को साल में एक बार धारण किया जाने वाला सवा मन का पुष्प मुकुट (सेहरा) पहनाया गया। भगवान महाकाल को अभिषेक और पूजा के बाद सेहरा से सजाया गया। सेहरा दर्शन के लिए भी आज मंदिर में बढ़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया।
महाशिवरात्रि की रात 11 बजे से सोमवार सुबह तक महाकालेश्वर की चार प्रहर की महाअभिषेक पूजा संपन्न हुई। इसके बाद भगवान महाकाल को नए वस्त्र पहनाए गए और सप्तधान्य से उनका मुखमंडल शृंगारित किया गया। सप्तधान्य में 31 किलो चावल, 11-11 किलो मूंग, तिल, मसूर, जौ, गेहूं, साल और उड़द अर्पित किए गए।
सिर पर सजा फूलों से बना सेहरा
सुबह 6 बजे सेहरा आरती की गई, जिसमें भगवान महाकाल को अलग-अलग प्रकार के फूलों की लड़ियां, आंकड़े के फूल, पुष्पों की मोटी-मोटी मालाएं चढ़ाई गईं। भगवान महाकाल को स्वर्ण और रजत आभूषण, छत्र, चंद्र मुकुट और त्रिपुंड अर्पित किए गए।
मंदिर समिति द्वारा भगवान महाकाल को चांदी का सिक्का और चांदी का बिल्वपत्र भी अर्पित किया गया। इस भव्य पूजा और आयोजन के बाद महाकालेश्वर के पट आज रात 44 घंटे बाद बंद किए जाएंगे। इस दौरान भक्तों में असीम उत्साह देखने को मिला और मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
सेहरे का प्रसाद लूटने की भी है परंपरा
महाकाल मंदिर के पंडित महेश पुजारी ने बताया कि सेहरा शृंगार का दर्शन पूरा होने के बाद महाकाल को चढ़ाया गया शृंगार जब उतारा जाता है तो इसे लूटने के लिए भी भक्त उतावले दिखाई देते हैं। इस परंपरा के बारे में शास्त्रों में तो कोई उल्लेख नहीं किया गया है लेकिन इसे सेहरा लूटने की परंपरा कहा जाता है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सेहरे के धान को घर में रखने से मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है, वहीं सेहरे के फूलों को लोग अपने घर की तिजोरी में रखते हैं ताकि धन की बरकत बनी रहे। फलों को भक्त प्रसादी के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।
आज दोपहर मे होगी भस्म आरती
वैसे तो बाबा महाकाल की भस्म आरती तड़के 4 बजे होती है लेकिन साल भर में एक बार सेहरा उतारे जाने के बाद दोपहर 12 बजे भस्म आरती की जाती है। इस बार दोपहर में होने वाली भस्म आरती में सामान्य श्रद्धालु भी दर्शन कर सकेंगे। भस्म आरती की पूरी व्यवस्था चलायमान रहने वाली है और निरंतर चलते हुए श्रद्धालु बाबा के दर्शन कार्तिकेय मंडपम से कर सकेंगे।
मंदिर प्रशासन द्वारा 40 से 45 मिनट में श्रद्धालुओं को दर्शन करवाए जाने का दावा किया जा रहा है। भस्म आरती के बाद 2.30 से 3 बजे तक भोग आरती होगी। शाम 5 से 5:45 तक संध्या पूजन होगा। शाम 6:30 से 7:15 तक संध्या आरती की जाएगी और रात 10:30 बजे शयन आरती के बाद 11 बजे पट बंद कर दिए जाएंगे।
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