रंगपंचमी के अवसर पर रविवार को शहर में मालवा की पारंपरिक लोक परंपरा के अनुसार रंगोत्सव मनाया गया। इसकी शुरुआत ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से हुई। तड़के सुबह 4 बजे भस्म आरती के दौरान पुजारियों ने भगवान महाकाल को एक लोटा केसरिया रंग अर्पित किया। इसके बाद शहर में विभिन्न स्थानों पर रंगपंचमी का उत्सव मनाया गया। शाम को गेर के रूप में इस परंपरा का नगर भ्रमण भी किया गया।
मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकाल मंदिर में रंगपंचमी पर पारंपरिक रूप से रंगपर्व मनाया गया। परंपरा के अनुसार प्रातःकालीन भस्म आरती में भगवान श्री महाकालेश्वर को एक लोटा केसर युक्त जल अर्पित किया गया। वहीं संध्या आरती के दौरान एक लोटा केसर युक्त जल और लगभग 500 ग्राम गुलाल अर्पित किया गया।
उन्होंने बताया कि गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम सहित पूरे मंदिर परिसर में किसी भी व्यक्ति को रंग, गुलाल, प्रेशर गन या पिचकारी लेकर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।
इसलिए किए गए विशेष इंतजाम
महाकालेश्वर मंदिर में रंगपंचमी के अवसर पर भस्म आरती के दौरान इस बार भगवान महाकाल को केवल एक लोटा केसर युक्त रंग अर्पित किया गया। मंदिर समिति ने दो साल पहले मंदिर परिसर में लगी आग की घटना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा कारणों से यह व्यवस्था जारी रखी है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया।
चेकिंग के बाद मिला मंदिर में प्रवेश
मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि सुबह भस्म आरती के दौरान भगवान को केसर युक्त जल अर्पित किया गया। मंदिर आने वाले भक्तों को सख्त जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया। साथ ही श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में रंग और गुलाल नहीं लाने का अनुरोध किया गया था। मंदिर समिति के अनुसार केसर युक्त रंग और जल मंदिर की कोठार शाखा से पुजारियों और शासकीय पुजारियों को उपलब्ध कराया गया। पंडे-पुजारियों को भी जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई।