उज्जैन में किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने दावा किया है कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर पद से हटा दिया गया है और अब उनका अखाड़े से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद वे स्वयं को किन्नर अखाड़े का प्रमुख बताकर लोगों को भ्रमित कर रही हैं।
मीडिया से चर्चा में अजय दास ने कहा कि आगामी सिंहस्थ महाकुंभ में केवल उनका ही किन्नर अखाड़ा स्थापित होगा और इस संबंध में सभी वैध दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रयागराज मेले में भी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अपने नाम से भूमि आवंटित कराकर किन्नर अखाड़े का बोर्ड लगाया, जो पूरी तरह अनुचित है।
2016 में हुआ था गठन
अजय दास के अनुसार, वर्ष 2016 के उज्जैन कुंभ में किन्नर अखाड़े का गठन किया गया था। अखाड़े की बढ़ती लोकप्रियता के बाद कुछ लोगों ने इसे समाप्त करने की साजिश रची। वर्ष 2019 के प्रयागराज अर्धकुंभ में अलग शिविर लगाकर स्नान किया गया था, लेकिन उनकी अस्वस्थता के दौरान लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कथित रूप से जूना अखाड़े के साथ बिना अनुमति समझौता कर लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद धर्म के नाम पर पदों का वितरण धनराशि लेकर किया जाने लगा। 21 लाख और 11 लाख रुपये लेकर जगतगुरु और महामंडलेश्वर जैसे पद दिए जाने के आरोप भी उन्होंने लगाए।
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ममता कुलकर्णी को पद देने पर आपत्ति
अजय दास ने कहा कि जब ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाया गया तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को भी पद से मुक्त कर दिया गया। उनका कहना है कि यदि भविष्य में किन्नर अखाड़े के नाम पर कोई भी गतिविधि संचालित की गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि 2015-16 के उज्जैन महाकुंभ में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया था, लेकिन निर्धारित उद्देश्य से भटकने के कारण उन्हें पदमुक्त किया गया।
किन्नर अखाड़े को लेकर जारी इस विवाद ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।